रुद्रपुर । गाय चारा कम खा रही है…जुगाली घट गई है… हीट साइकिल शुरू होने वाली है…या फिर बीमारी का खतरा मंडरा रहा है…। यह जानकारी अब किसी पशु चिकित्सक के पहुंचने का इंतजार नहीं करती। बल्कि एक छोटा-सा सेंसर और मोबाइल पर आने वाला अलर्ट गोपालक को पहले ही सब कुछ बता देता है।
बाजपुर ब्लाक की ग्राम पंचायत हरसान स्थित मधुबन गोशाला में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने पशुपालन की परंपरागत तस्वीर बदल दी है। यहां तकनीक सिर्फ मशीन नहीं, बल्कि महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का नया हथियार बन चुकी है।
एआई आधारित स्मार्ट कम्युनिटी डेयरी
उत्तराखंड की पहली एआई आधारित स्मार्ट कम्युनिटी डेयरी आज यह साबित कर रही है कि गांवों की प्रगति अब डिजिटल तकनीक और महिला नेतृत्व के साथ नई ऊंचाइयों को छूने की तैयारी में है। दानू स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की ओर से संचालित यह डेयरी आइएफएडी-वित्तपोषित ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना के सहयोग से विकसित की गई है।
इसका उद्देश्य केवल दूध उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक पशुपालन को गांवों तक पहुंचाना भी है। सीडीओ दिवेश शाशनी के निर्देशन, परियोजना निदेशक डीआरडीए हिमांशु जोशी और जिला परियोजना प्रबंधक ग्रामोत्थान (रीप) की देखरेख में यह माडल तैयार हुआ है, जिसे अब अन्य क्षेत्रों में भी अपनाने की तैयारी चल रही है।
एआई ने संभाली पशुओं की डिजिटल पहरेदारी
मधुबन गोशाला की सबसे बड़ी विशेषता इसका एआई आधारित स्मार्ट कैटल हेल्थ मानिटरिंग सिस्टम है। प्रत्येक गाय और भैंस के गले में लगाया गया स्मार्ट सेंसर दिन-रात उसकी गतिविधियों का विश्लेषण करता है।

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