लालकुआं में 27 सितंबर की महारैली के बाद अब तहसील में डेरा, बिंदुखत्तावासियों ने कहा—“आश्वासन नहीं, आदेश चाहिए” (देखे वीडियो)

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लालकुआं। “ले मशालें चल पड़े हैं लोग मेरे गांव के…” जनगीत की गूंज और आंदोलनकारियों के जोशीले नारों के बीच सोमवार को तहसील परिसर बिंदुखत्ता की मांगों का केंद्र बन गया। राजस्व ग्राम की अधिसूचना जारी करने और गौला नदी किनारे स्थायी तटबंध निर्माण की मांग को लेकर वन अधिकार संगठन के नेतृत्व में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया गया है।

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तहसील परिसर में जुटे बिंदुखत्तावासियों ने स्पष्ट किया कि वर्षों से चली आ रही मांग अब केवल ज्ञापनों और आश्वासनों तक सीमित नहीं रहेगी। आंदोलनकारियों ने सरकार से बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम की अधिसूचना जारी करने के साथ ही गौला नदी के कटाव से स्थायी सुरक्षा के लिए तटबंध निर्माण शुरू कराने की मांग उठाई।

आंदोलनकारियों के अनुसार, बिंदुखत्ता के 32 गांवों के 11,703 दावेदारों का सामूहिक दावा 19 जून 2024 को जिला स्तरीय वन अधिकार समिति से सर्वसम्मति से पारित हो चुका है। इसके बावजूद राजस्व ग्राम की अधिसूचना जारी नहीं होने से क्षेत्रवासियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

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27 सितंबर को आयोजित महारैली के बाद सरकार की ओर से मिले आश्वासन के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होने पर बिंदुखत्तावासियों ने अब अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है। आंदोलनकारियों ने कहा कि अब आश्वासन नहीं, आदेश चाहिए और सर्वे नहीं, बल्कि गौला नदी पर स्थायी तटबंध चाहिए।

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तहसील परिसर में चल रहे धरने में वन अधिकार संगठन के पदाधिकारियों के साथ पूर्व सैनिक, राज्य आंदोलनकारी और बिंदुखत्ता के ग्रामीण शामिल हुए। जनगीतों और नारों के बीच आंदोलनकारियों ने कहा कि मांगें पूरी होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

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