हल्दूचौड़ यूसीएफ सोयाबीन फैक्ट्री में पेड़ों के कटान पर वन विभाग की छापेमारी, मचा हड़कंप

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हल्दूचौड़। उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ (यूसीएफ) की हल्दूचौड़ स्थित सोयाबीन फैक्ट्री परिसर में पेड़ों के कटान का मामला सामने आने के बाद शनिवार देर शाम वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की। हल्द्वानी रेंज की टीम के फैक्ट्री पहुंचते ही परिसर में हलचल मच गई। इस दौरान फैक्ट्री के जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं मिले।

वन विभाग की टीम ने परिसर में कटे पेड़ों और मौके की स्थिति का निरीक्षण किया। टीम ने कटे पेड़ों की प्रजाति और संख्या के साथ ही कटान से संबंधित अनुमति एवं अभिलेखों की जानकारी जुटाई। अब यह जांच की जा रही है कि पेड़ों के कटान से पहले वन विभाग अथवा किसी सक्षम प्राधिकारी से नियमानुसार अनुमति ली गई थी या नहीं।

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मौके पर संविदा पर तैनात इलेक्ट्रिशियन हरीश कांडपाल ने वन विभाग की टीम को बताया कि पेड़ों के कटान की कार्रवाई विधायक के निर्देश पर की गई है। उन्होंने इसके लिए विधायक की ओर से लिखित पत्र दिए जाने की बात भी कही। हालांकि, उनके द्वारा प्रस्तुत किया गया पत्र वर्ष 2024 का निकला।

बताया गया कि यह पत्र पूर्व विधायक नवीन दुम्का की ओर से स्थानीय निवासी महेंद्र सिंह के आवेदन पर की गई संस्तुति से संबंधित है। ऐसे में अब वन विभाग इस बात की जांच कर रहा है कि वर्ष 2024 की उक्त संस्तुति का वर्तमान में फैक्ट्री परिसर में किए गए पेड़ कटान से कोई संबंध है या नहीं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि उक्त पत्र के आधार पर बाद में किसी सक्षम विभाग से अलग से अनुमति ली गई थी या नहीं।

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खास बात यह है कि फैक्ट्री कर्मचारी ने वर्तमान विधायक के निर्देश पर पेड़ कटान किए जाने की बात कही, जबकि इसके समर्थन में प्रस्तुत पत्र विधायक नवीन दुमका का वर्ष 2024 का है। ऐसे में पत्र की विषयवस्तु, उसकी वैधता और वर्तमान कटान से उसके संबंध को लेकर भी जांच की जा रही है।

यूसीएफ की इसी फैक्ट्री में ध्वस्तीकरण के नाम पर गहरी खुदाई और मलबे के निस्तारण को लेकर पहले से जांच चल रही है। विभागीय स्तर पर स्थल निरीक्षण और अभिलेखों की पड़ताल की जा रही है। अब पेड़ों के कटान का मामला सामने आने के बाद फैक्ट्री परिसर में चल रही गतिविधियों को लेकर जांच का दायरा बढ़ गया है।

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वन विभाग की टीम के मौके पर पहुंचने के दौरान फैक्ट्री के जिम्मेदार अधिकारियों के मौजूद नहीं होने से भी कई सवाल खड़े हुए हैं। पेड़ों के कटान का निर्णय किस स्तर पर लिया गया, कटान से पहले अनुमति ली गई थी या नहीं और वर्ष 2024 की संस्तुति का वर्तमान कटान से क्या संबंध है, इन सभी बिंदुओं की जांच की जा रही है।

वन विभाग की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि फैक्ट्री परिसर में पेड़ों का कटान नियमानुसार अनुमति लेकर किया गया था या नहीं। फिलहाल टीम ने मौके का निरीक्षण कर संबंधित अभिलेखों की पड़ताल शुरू कर दी है।

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