किच्छा। किच्छा और सिरौलीकलां की सियासत के लिए 7 अक्टूबर का दिन बेहद अहम होने जा रहा है। मतगणना के साथ ही स्ट्रांग रूम में बंद मतपेटियों का फैसला सामने आएगा और नगर की सियासी तस्वीर साफ होने लगेगी। वार्डवार रुझानों के बाद अध्यक्ष पद की स्थिति भी स्पष्ट होती जाएगी।
चुनाव प्रचार के दौरान स्थानीय मुद्दों से लेकर राजनीतिक धड़ों के प्रभाव तक कई तरह की चर्चाएं सामने आईं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि मतदाताओं ने स्थानीय मुद्दों और प्रत्याशियों की व्यक्तिगत पकड़ को तरजीह दी है या बड़े राजनीतिक चेहरों का प्रभाव मतदान पर दिखाई देगा। इसका जवाब मतगणना के दौरान सामने आने वाले रुझान देंगे।
सिरौलीकलां के लिए यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि नवगठित नगर पालिका के राजनीतिक नेतृत्व की पहली तस्वीर इसी मतगणना के जरिए सामने आएगी। यहां आने वाले परिणाम भविष्य की स्थानीय राजनीति की दिशा तय करने में भी अहम माने जा रहे हैं।
अब बयान नहीं, मतपेटियां देंगी जवाब
किच्छा-सिरौलीकलां चुनाव के दौरान सियासी बयानबाजी, प्रशासनिक फैसलों और अदालत से जुड़े घटनाक्रमों ने चुनावी माहौल को लगातार चर्चा में बनाए रखा। लेकिन अब इन तमाम चर्चाओं पर विराम लगाते हुए अंतिम फैसला मतपेटियों से सामने आएगा।
किच्छा की स्थानीय राजनीति में पूर्व मंत्री हरीश चंद्र बेहड़ और भाजपा नेता नवीन चंद्र शुक्ला से जुड़े राजनीतिक खेमों के प्रभाव को लेकर भी चुनाव के बाद नई चर्चाएं शुरू होने की संभावना है। हालांकि वास्तविक तस्वीर मतगणना के रुझानों और परिणाम सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
फिलहाल प्रत्याशियों और समर्थकों की निगाहें स्ट्रांग रूम पर टिकी हैं। 7 अक्टूबर को ताले खुलेंगे, मतगणना शुरू होगी और वार्डवार रुझानों के साथ किच्छा-सिरौलीकलां की जनता का फैसला सामने आएगा।
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