लालकुआं। बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग को लेकर चल रहा क्रमिक अनशन 17वें दिन भी जारी रहा। राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग को लेकर क्षेत्रवासियों का आंदोलन लगातार जारी है। वहीं, सरकार की ओर से अब तक स्पष्ट निर्णय सामने नहीं आने से आंदोलनकारियों में नाराजगी है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा दिलाने के लिए क्षेत्रवासी पिछले कई वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं। इस दौरान लगातार धरना-प्रदर्शन और अन्य आंदोलनात्मक गतिविधियों के माध्यम से सरकार का ध्यान इस मांग की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हो पाया है।
आंदोलनकारियों ने कहा कि क्रमिक अनशन के 17 दिन बीत जाने के बावजूद किसी उच्च अधिकारी के अनशन स्थल पर नहीं पहुंचने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। उन्होंने सरकार से मामले में जल्द निर्णय लेने और आंदोलनकारियों से वार्ता करने की मांग की।
शुक्रवार को अनशन पर बैठे नगर कांग्रेस कमेटी लालकुआं के पूर्व महामंत्री सईद सिद्दीकी ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बिंदुखत्ता की जनता वर्षों से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही है, लेकिन इस गंभीर मुद्दे पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
सईद सिद्दीकी ने कहा, “यह सरकार बिना बलिदान लिए कोई काम नहीं करती। हम भी बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा दिलाने के लिए इस अनशन के माध्यम से बलिदान देने को तैयार हैं। आखिर जनता को अपने जायज अधिकारों के लिए कब तक संघर्ष करना पड़ेगा? सरकार को अब अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए और बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने के संबंध में स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग वर्षों पुरानी है। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से आंदोलन को गंभीरता से लेते हुए तत्काल वार्ता करने और राजस्व ग्राम का दर्जा दिलाने की दिशा में ठोस पहल करने की मांग की।
सईद सिद्दीकी ने कहा कि बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने की लड़ाई जनता के अधिकारों से जुड़ी है। जब तक इस मांग पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन के माध्यम से जनता की आवाज उठाई जाती रहेगी।
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