22.50 लाख के ऋण के नाम पर 45 हजार की रिश्वत मांगने वाला “डेयरी विभाग का फर्जी अधिकारी आगरा से गिरफ्तार”

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देहरादून। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने पशुपालन एवं डेयरी विभाग का अधिकारी बनकर लोन स्वीकृत कराने के एवज में 45 हजार रुपये रिश्वत मांगने वाले जालसाज को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है।
करीब 20 दिनों तक फरार रहने और लगातार ठिकाने बदलने के बाद सीबीआइ ने आरोपित को उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से दबोच लिया।
जांच में पता चला कि आरोपित का असली नाम प्रभु दयाल है, जबकि वह खुद को ऋषि गुप्ता बताकर सरकारी अधिकारी के रूप में लोगों से ठगी और रिश्वत वसूली करता था।

सीबीआइ के अनुसार 29 जून 2026 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज किया गया था।शिकायतकर्ता ऊधम सिंहनगर निवासी शकील अहमद ने बताया था कि उन्होंने अपने मदीना पोल्ट्री फार्म के लिए एनिमल हसबेंड्री इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड योजना के तहत 22.50 लाख रुपये के ऋण के लिए आवेदन किया था।

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इसी दौरान आरोपित ने खुद को पशुपालन एवं डेयरी विभाग, कृषि भवन, नई दिल्ली का अधिकारी बताकर ऋण स्वीकृत कराने के एवज में 45 हजार रुपये रिश्वत की मांग की।
आरोपित ने क्यूआर कोड से रिश्वत की रकम मंगाई, जिसके चलते पीड़ित ने पहली किस्त के रूप में पांच हजार रुपये भेज दिए।
जांच में पता चला कि यह क्यूआर कोड विकास त्रिपाठी नामक व्यक्ति के बैंक खाते से जुड़ा था। सीबीआइ ने अगले दिन विकास त्रिपाठी को हिरासत में लेकर पूछताछ की, लेकिन उसने बताया कि वह आरोपित को नहीं जानता और उसके खाते का इस्तेमाल किया गया था।

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जांच के दौरान सामने आया कि आरोपित सरकारी अधिकारी नहीं बल्कि एक निजी व्यक्ति था। योजना के आवेदकों की जानकारी हासिल कर उन्हें फोन करता और आवेदन निरस्त होने या स्वीकृति दिलाने के नाम पर रिश्वत मांगता था।
अपनी पहचान छिपाने के लिए वह कभी अपने बैंक खाते का इस्तेमाल नहीं करता और अलग-अलग लोगों के खातों में पैसे मंगवाकर आगे ट्रांसफर कर देता था।

गिरफ्तारी से बचने के लिए बदल रहा था ठिकाने

आरोपित गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार आगरा, जयपुर और नई दिल्ली सहित विभिन्न स्थानों पर ठिकाने बदलता रहा।
सीबीआइ ने मोबाइल काल डिटेल रिकार्ड, बैंक खातों, आईपी एड्रेस और डिजिटल सर्विलांस के जरिए उसकी गतिविधियों पर नजर रखी। आखिरकार 19 जुलाई को सूचना मिली कि वह अपने गांव छोटा बिसराना, आगरा पहुंचा है, जहां से उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

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घर से बरामद हुए आपत्तिजनक दस्तावेज

गिरफ्तारी के दौरान सीबीआइ को पता चला कि आरोपित का वास्तविक नाम प्रभु दयाल है और वह फर्जी पहचान के सहारे लोगों को धोखा दे रहा था।
उसके घर की तलाशी में कई आपत्तिजनक दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। मामले की जांच जारी है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों से इसी तरह रिश्वत और ठगी की है।

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