हल्द्वानी। काठगोदाम स्थित गौला पुल के नीचे पुल की सुरक्षा के लिए बनाए गए चेक डैम के ब्लॉक पहली ही तेज बारिश का दबाव नहीं झेल सके। तेज बहाव के बीच कई ब्लॉक बहने लगे, जिससे बरसात के दौरान पुल की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। गौला नदी के बढ़ते जलस्तर से कटाव का खतरा भी बढ़ गया है।
सुबह बढ़ा जलस्तर, शाम तक घटी नदी
शुक्रवार सुबह गौला नदी का जलस्तर 15,058 क्यूसेक दर्ज किया गया, जो गुरुवार सुबह के 12,408 क्यूसेक की तुलना में 2,650 क्यूसेक अधिक था। हालांकि शाम करीब 4:30 बजे जलस्तर घटकर 889 क्यूसेक रह गया, लेकिन सुबह का तेज बहाव नदी की रफ्तार और उसके असर का अंदाजा लगाने के लिए पर्याप्त था।
पुल की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल के पिलरों की सुरक्षा के लिए लगाए गए चेक डैम के ब्लॉक यदि पहली ही बड़ी बारिश में बहने लगें, तो पूरे मानसून के दौरान पुल की सुरक्षा चिंता का विषय बन सकती है। लोगों ने संबंधित विभाग से तत्काल निरीक्षण कर क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत कराने की मांग की है।
पहले भी हो चुका है नुकसान
गौरतलब है कि सितंबर 2024 में इसी पुल के किनारे का पुस्ता टूटकर गौला नदी में समा गया था। क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत करने में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को काफी समय लगा था। यह पुल कुमाऊं के पर्वतीय क्षेत्रों के साथ ही गौलापार, सितारगंज, टनकपुर और पीलीभीत को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। ऐसे में बरसात के दौरान इसकी सुरक्षा में किसी भी तरह की लापरवाही भारी पड़ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रही बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए कटाव की निगरानी और पुल की सुरक्षा व्यवस्था को समय रहते मजबूत किया जाना आवश्यक है।
क्या बोले एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर
एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अचल जिंदल ने कहा, “अभी सूचना मिली है। मौके का निरीक्षण किया जाएगा। जांच के बाद जो भी कमियां सामने आएंगी, उन्हें तत्काल दूर कराया जाएगा।”

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