अल्मोड़ा। हवालबाग ब्लॉक के वडयूड़ा गांव में प्राकृतिक आपदा ने एक परिवार की खुशियों को पलभर में मातम में बदल दिया। जिस घर में चार माह बाद बेटी की शादी की तैयारियां होनी थीं, बुधवार को उसी परिवार की मां और उसके बेटा-बेटी की एक साथ अंत्येष्टि हुई। एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत से गांव में शोक की लहर है।
पातलीबगड़ स्थित राममंदिर के पास ब्रह्मघाट गौंउधार में गमगीन माहौल के बीच तीनों का अंतिम संस्कार किया गया। हादसे में प्रेमा देवी, उनकी बेटी कल्पना आर्या और बेटे मनीष की मौत हो गई। परिवार के मुखिया राजेंद्र राम के लिए दिल्ली से अल्मोड़ा तक का सफर जिंदगी का सबसे पीड़ादायक सफर बन गया। परिवार बेटी की शादी को लेकर खुशियों के सपने संजो रहा था, लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। जिस घर में जल्द ही शहनाई गूंजने वाली थी, वहां अब मातम पसरा है।
हादसे के समय 80 वर्षीय दादा भी बगल के कमरे में सो रहे थे। अचानक पहाड़ी से आया मलबा मकान में घुस गया और उनकी आंखों के सामने बहू, नाती और नातिन मलबे में दब गए। बुजुर्ग ने हिम्मत नहीं हारी और हाथों से मलबा हटाकर अपनों को बचाने की आखिरी कोशिश करते रहे, लेकिन उनकी कोशिश सफल नहीं हो सकी।
बुधवार को जब तीनों की चिताएं एक साथ जलीं तो दादा की आंखों के सामने हादसे का पूरा मंजर घूमता रहा। अपनों को खोने का दर्द उनके चेहरे पर साफ नजर आ रहा था। कुछ ही पलों में एक परिवार की तीन जिंदगियां हमेशा के लिए खत्म हो गईं और जिस घर में शादी की खुशियां आने वाली थीं, वहां मातम की खामोशी छा गई।
अंतिम संस्कार के दौरान राजेंद्र राम के छोटे भाई केदार ने अपनी भाभी, भतीजे और भतीजी को मुखाग्नि दी। इस दौरान परिजनों के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौजूद रहे।
जनप्रतिनिधियों ने जताया शोक
वडयूड़ा गांव में हुए इस दर्दनाक हादसे पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा, पूर्व राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा, महेश नयाल, राजेंद्र बाराकोटी, अजय पाल, रमेश भाकुनी, शिवराज नयाल, बीडीसी सदस्य आशीष कुमार, सुंदर राम, पान सिंह और गोविंद राम समेत जनप्रतिनिधियों व स्थानीय लोगों ने शोक जताया। उन्होंने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगतों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

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