हल्द्वानी। नेपाल में पिछले वर्ष हुए जनजीवन आंदोलन के दौरान गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हुई एक युवती को अब इलाज की नई उम्मीद हल्द्वानी से मिली है। नेपाल में लंबे समय तक उपचार के बावजूद हाथ की नसों की चोट ठीक नहीं होने पर युवती भारत पहुंची है। अब उसके हाथ की जटिल नसों (ब्रेकियल प्लेक्सस) की सर्जरी हल्द्वानी के ब्रेकियल प्लेक्सस सर्जन ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) डॉ. पीएस भंडारी करेंगे।
64 दिन अस्पताल में रही भर्ती
पीएसपी अस्पताल के डॉ. पीएस भंडारी ने बताया कि काठमांडू विश्वविद्यालय में विजुअल आर्ट्स की 21 वर्षीय छात्रा लिजा अधिकारी आठ सितंबर 2025 को नेपाल में हुए आंदोलन के दौरान गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। गोली उनकी छाती में लगी और कंधे से बाहर निकल गई, जिससे कंधे की हड्डियां बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं और हाथ की नसों को भी गंभीर नुकसान पहुंचा।
घटना के बाद लिजा का नेपाल के नेशनल ट्रॉमा सेंटर में चार बार ऑपरेशन किया गया। वह 64 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहीं। इसके बाद एक निजी अस्पताल में भी करीब एक माह तक उनका इलाज चला। उपचार के दौरान कंधे में धातु की प्लेट लगाई गई और लंबे समय तक फिजियोथेरेपी भी कराई गई, लेकिन हाथ की हरकत वापस नहीं आ सकी।
लिजा ने बताया कि डॉक्टरों ने चोट लगने के पांच महीने के भीतर नसों की रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी कराने की सलाह दी थी, लेकिन विदेश में इलाज के लिए नेपाल सरकार से आर्थिक सहायता मिलने में देरी हो गई। ऐसे में परिवार ने सरकारी मंजूरी का इंतजार करने के बजाय स्वयं खर्च वहन कर भारत आकर इलाज कराने का निर्णय लिया।
अब हल्द्वानी में डॉ. पीएस भंडारी उनकी ब्रेकियल प्लेक्सस की जटिल सर्जरी करेंगे, जिससे हाथ की कार्यक्षमता वापस आने की उम्मीद है।

लेटेस्ट न्यूज़ अपडेट के लिए -
www.devbhumionline.com
