रामनगर (कॉर्बेट) हवाई फायरिंग और हिम्मत से मौत के जबड़े से वनकर्मी को खींच लाए साथी : झाड़ियों में छिपा था बाघ, पीछे चल रहे वनकर्मी पर झपटा

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रामनगर (नैनीताल)। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के सर्पदुली रेंज में गश्त के दौरान झाड़ियों में घात लगाए बैठे बाघ ने एक वनकर्मी पर हमला कर उसे घायल कर दिया। हालांकि, साथ चल रहे चार वनकर्मियों की सूझबूझ और बहादुरी से बड़ा हादसा टल गया। वनकर्मियों ने हवाई फायरिंग की, शोर मचाया और लाठियां फटकारकर बाघ को भगा दिया, जिससे घायल वनकर्मी की जान बच गई।

सुंदरखाल गांव निवासी पीतांबर सौनी (30) पुत्र मोहन राम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की सर्पदुली रेंज में दैनिक श्रमिक के रूप में कार्यरत हैं। सोमवार को वनकर्मी रावत, नवीन, रामनाथ, मनोज कुमार और दैनिक श्रमिक पीतांबर सौनी जंगल में गश्त करने के बाद सर्पदुली कैंप लौट रहे थे। चार वनकर्मी आगे चल रहे थे, जबकि पीतांबर सबसे पीछे थे। सभी के पास सुरक्षा के लिए बंदूक और लाठियां थीं।

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इसी दौरान झाड़ियों में घात लगाए बैठे बाघ ने अचानक पीतांबर पर हमला कर दिया। बाघ के झपटते ही वह जमीन पर गिर गए और बाघ उन्हें जबड़ों में दबोचने का प्रयास करने लगा।

साथी वनकर्मियों ने बिना देर किए सरकारी बंदूक से कई राउंड हवाई फायरिंग की। वहीं अन्य वनकर्मी शोर मचाते हुए जमीन पर लाठियां फटकारने लगे। वनकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से बाघ पीतांबर को छोड़कर जंगल की ओर भाग गया।

इसके बाद साथी वनकर्मी पीतांबर को सुरक्षित स्थान पर लाए और अधिकारियों को घटना की सूचना दी। विभागीय वाहन से उन्हें रामनगर के सरकारी अस्पताल पहुंचाया गया। बाघ के पंजों से उनके गले के आगे वाले हिस्से में गंभीर चोटें आई हैं। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए काशीपुर के एक निजी अस्पताल रेफर कर दिया गया।

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घटना की जानकारी मिलने पर पार्क वार्डन बिंदर पाल और सर्पदुली रेंजर संजय पांडे अस्पताल पहुंचे और घायल वनकर्मी का हालचाल जाना। पार्क वार्डन बिंदर पाल ने बताया कि वनकर्मियों की सतर्कता और हवाई फायरिंग के कारण बाघ के हमले से वनकर्मी की जान बच गई। अस्पताल में वन विभाग के अधिकारियों ने घायल के स्वजनों को ढांढस भी बंधाया।

मानसून में गश्त के लिए जारी किए गए दिशा-निर्देश

मानसून के दौरान जंगलों में घनी झाड़ियां और वनस्पति बढ़ जाने से वन्यजीवों के अचानक सामने आने का खतरा बढ़ जाता है। इसे देखते हुए वन विभाग ने गश्त के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों के अनुसार कोई भी कर्मचारी बिना सुरक्षा उपकरण के गश्त पर नहीं जाएगा। गश्त के दौरान पांच से छह सदस्य एक साथ रहेंगे और आने-जाने की सूचना कंट्रोल रूम को देंगे। प्रत्येक टीम के पास बंदूक, स्मार्ट स्टिक और लाठी होना अनिवार्य होगा। साथ ही चलते समय आपस में अधिक दूरी नहीं रखी जाएगी तथा विश्राम के दौरान सभी अलग-अलग दिशाओं की ओर मुंह करके बैठेंगे, ताकि किसी भी वन्यजीव की गतिविधि पर तुरंत नजर रखी जा सके।

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साकेत बडोला, निदेशक, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व ने बताया कि घायल वनकर्मी की हालत फिलहाल खतरे से बाहर है। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए काशीपुर भेजा गया है और विभागीय स्टाफ उनकी लगातार निगरानी कर रहा है।

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