उत्तराखंड में वोटर लिस्ट पर सबसे ज्यादा आपत्तियां, नैनीताल-ऊधमसिंह नगर-हरिद्वार में आयोग की विशेष निगरानी
देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान वोट काटने को लेकर दर्ज आपत्तियों ने चुनाव आयोग का ध्यान नैनीताल, ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार जिलों पर केंद्रित कर दिया है। इन तीन जिलों में फॉर्म-10 के तहत सबसे ज्यादा आपत्तियां दर्ज होने के बाद आयोग ने विशेष निगरानी बढ़ा दी है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने तीनों जिलों में निगरानी के लिए नौ आईएएस और पीसीएस अधिकारियों को पर्यवेक्षक के रूप में तैनात किया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी मतदाता का नाम केवल आपत्ति दर्ज होने के आधार पर नहीं हटाया जाएगा। संबंधित मतदाता और आपत्तिकर्ता को नोटिस जारी कर सुनवाई के बाद ही नियमानुसार फैसला लिया जाएगा।
एक व्यक्ति पांच या इससे अधिक आपत्तियां दर्ज कर सकता है। ऊधमसिंह नगर की किच्छा विधानसभा क्षेत्र में राजेश तिवारी के नाम से 5,906 आपत्तियां दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। किच्छा में कुल 8,767 आपत्तियां दर्ज हुई हैं। इसके अलावा हल्द्वानी में 7,312, जसपुर में 6,720, काशीपुर में 5,704, रुद्रपुर में 4,958 और गदरपुर में 4,785 आपत्तियां दर्ज होने की जानकारी है।
SIR के दौरान 40,906 ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें मतदाता घर पर नहीं मिले या उनके दूसरी जगह चले जाने की जानकारी मिली। इसके अलावा 2,575 मतदाताओं के स्थायी रूप से दूसरी जगह चले जाने की शिकायतें दर्ज हुई हैं। अब निर्वाचन विभाग के सामने इन मामलों का सत्यापन करना बड़ी चुनौती है।
लापरवाही पर अफसरों की तय होगी जिम्मेदारी
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने सोमवार को कुमाऊं और गढ़वाल मंडल के आयुक्तों समेत देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर के जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से SIR की समीक्षा की।
बैठक में जिलाधिकारियों ने दावे और आपत्तियों के निस्तारण की अब तक की कार्रवाई और आगे की रणनीति की जानकारी दी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी दावों और आपत्तियों की नियमानुसार सुनवाई की जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने जिला निर्वाचन अधिकारियों को राजनीतिक दलों और मीडिया के साथ नियमित संवाद बनाए रखने के निर्देश भी दिए। इसके साथ ही फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 के निस्तारण की भी समीक्षा की गई।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने निर्देश दिए कि जिन बूथों पर चार प्रतिशत से अधिक परिवर्धन और दो प्रतिशत से अधिक अपमार्जन की संभावना है, वहां संबंधित निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) व्यक्तिगत निरीक्षण कर नियमानुसार कार्रवाई करें।
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