यहां गलत इंजेक्शन से 17 वर्षीय छात्र की नाक-चेहरा गला, तीन सर्जरी के बाद भी नहीं सुधरी हालत

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काशीपुर। रूट कैनाल उपचार के दौरान कथित तौर पर गलत तरीके से इंजेक्शन लगाए जाने से 17 वर्षीय छात्र के चेहरे पर गंभीर संक्रमण फैलने और नाक के आसपास का हिस्सा क्षतिग्रस्त होने का मामला सामने आया है। छात्र की मां की तहरीर पर काशीपुर कोतवाली पुलिस ने बीडीएस चिकित्सक डॉ. संजय कुमार गोला के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामला करीब एक साल पुराना बताया जा रहा है।
जसपुर खुर्द निवासी मीना यादव ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि जुलाई 2025 में उनका बेटा तेजस यादव मुरादाबाद रोड स्थित यशोवीर डेंटल केयर में दांत की रूट कैनाल कराने गया था। आरोप है कि उपचार के दौरान चिकित्सक ने तेजस को गलत स्थान पर एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगा दिया। इसके बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजनों के अनुसार उसे खून की उल्टी हुई और रक्तचाप भी अनियंत्रित हो गया।
इसके बाद तेजस के चेहरे पर गंभीर संक्रमण फैल गया और उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई। परिजन उसे उपचार के लिए दिल्ली स्थित अपोलो अस्पताल ले गए, जहां उसकी अब तक तीन सर्जरी हो चुकी हैं। संक्रमण के कारण नाक और उसके आसपास का हिस्सा क्षतिग्रस्त होने से चेहरे पर भी गंभीर असर पड़ा है। परिजनों का आरोप है कि चिकित्सकीय लापरवाही के कारण उनके बेटे की जिंदगी संकट में पड़ गई। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के चलते उसका विश्वविद्यालय में दाखिला भी निरस्त हो गया।

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तीन बार शिकायत के बाद हुई कार्रवाई
मीना यादव के मुताबिक उन्होंने मामले को लेकर पिछले वर्ष 16 अक्टूबर और इस वर्ष 20 जनवरी को मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की थी। इसके बाद 29 जनवरी को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय के माध्यम से भी शिकायत की गई। आरोप है कि कार्रवाई में देरी हुई। बाद में स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच कराई गई और चिकित्सक पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
जांच में क्लीनिक के पंजीकरण पर भी सवाल
सीएमओ के निर्देश पर मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई थी। समिति में एसीएमओ डॉ. डीपी सिंह, वरिष्ठ डेंटिस्ट डॉ. आदित्य सिंह और वरिष्ठ सर्जन डॉ. तरुण सिंह तोमर शामिल थे।
11 जून 2026 को दी गई जांच रिपोर्ट के अनुसार, रूट कैनाल के दूसरे चरण में एनेस्थीसिया दिए जाने के बाद छात्र की हालत बिगड़ी और वह सदमे जैसी स्थिति में चला गया। रिपोर्ट में एनेस्थीसिया के अनुचित प्रयोग के कारण रक्त वाहिका प्रभावित होने और नाक के आसपास नेक्रोसिस (ऊतक के क्षतिग्रस्त होकर नष्ट होने) की बात कही गई है।

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जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित डेंटल क्लीनिक पंजीकृत नहीं था। समिति ने गैर-पंजीकृत केंद्र पर चिकित्सा सेवाएं संचालित करने के मामले में 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाने और क्लीनिक को तत्काल बंद कराने की संस्तुति की थी।
वहीं, पीड़ित की मां का आरोप है कि जुर्माना लगाने के बावजूद क्लीनिक अब भी संचालित हो रहा है। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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