50 करोड़ से अधिक अतिरिक्त शुल्क का मामला: स्कूलों की मनमानी पर शिक्षा विभाग सख्त, मनमानी फीस लौटाएं वरना लगेगा जुर्माना

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हल्द्वानी। निजी स्कूल अभिभावकों की जेब काटने से नहीं चूकते हैं। मनमाना शुल्क लगाकर बच्चों के माता-पिता पर बोझ डाला जाता है।
स्टेशनरी व यूनिफार्म विक्रेताओं संग मिलकर कमीशन का खुला खेल खेला जाता है। लेकिन, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल और तत्कालीन सीईओ जीआर जायसवाल की सख्ती से इस बार पोल खुल गई है।

सख्ती से खुल गई पोल 

शिक्षा विभाग की समिति की जांच में नैनीताल जिले के स्कूलों की ओर से करीब 50 करोड़ रुपये से ज्यादा फीस वसूलने की बात सामने आई थे। जिसमें 114 स्कूलों में से कई में 4500 रुपये तक परीक्षा और 300 से 1000 रुपये तक टीसी शुल्क लेने जैसे तथ्य उजागर हुए।

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इनमें से 56 विद्यालयों ने फीस ज्यादा होने की बात स्वीकार करते हुए समायोजन का भरोसा भी दिया था। ऐसे में तत्कालीन सीईओ जायसवाल ने 27 जून को आदेश जारी कर अतिरिक्त शुल्क समायोजित करने के निर्देश दिए थे।
एक सप्ताह में समायोजन का हिसाब देने को कहा गया था, लेकिन 10 दिन गुजरने के बाद भी विद्यालय संचालकों ने शपथ पत्र नहीं सौंपा। स्कूलों की ऐसी मनमानी को देख नए सीईओ रणजीत सिंह नेगी ने कार्यभार ग्रहण करते ही कड़ा रुख अपना है।

गुरुवार को सभी नोटिस जारी कर स्कूल प्रबंधकों के रवैये पर नाराजगी जताई है। संबंधित सभी विद्यालय संचालकों से शुक्रवार को दोपहर 12 बजे तक जून अंतिम सप्ताह में जारी आदेशों के क्रियान्वयन की जानकारी देने काे कहा है। जिसके लिए गूगल फार्म जारी भी जारी किया है। पत्र की अनदेखी करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है।

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अतिरिक्त शुल्क समायोजन नहीं किया तो एक लाख का जुर्माना

सीईओ रणजीत सिंह नेगी ने बताया कि निजी स्कूलों की मनमानी कतई बर्दाश्त नहीं होगी। परीक्षा शुल्क 600 रुपये, टीसी शुल्क एक रुपये और तीन वर्ष में सिर्फ 10 प्रतिशत शुल्क ही बढ़ाने सहित 11 बिंदुओं पर पूर्व में जारी आदेश का पालन करना होगा। साथ ही अतिरिक्त शुल्क का समायोजन करना होगा। ऐसा न करने वालों पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।

मान्यता रद करने की होगी कार्रवाई

सीईओ नेगी ने बताया कि आदेश का पालन नहीं करने वाले सीबीएसई संबद्ध स्कूलों पर जुर्माना लगाने के साथ ही संबद्धता रद करने के लिए बोर्ड को लिखा जाएगा। साथ ही उत्तराखंड बोर्ड से संबद्ध निजी स्कूलों की मान्यता भी रद की जाएगी। इसके अलावा हिंदी माध्यम की मान्यता लेकर अंग्रेजी माध्यम संचालित करने पर भी कार्रवाई होगी।

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नैनीताल जिले में पहली बार स्कूलों पर सख्त कार्रवाई हुई और कठोर आदेश जारी किया गया। लेकिन, निर्देशों का पालन नहीं होना प्राइवेट स्कूल संचालकों की हठधर्मिता को दर्शाता है। कड़ा एक्शन लिया जाना चाहिए। – मदन मोहन जोशी, संयोजक, अभिभावक संघर्ष समिति

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