सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: बनभूलपुरा की भूमि रेलवे की, अतिक्रमण पर रोक बरकरार

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हल्द्वानी। बनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे भूमि पर बने अतिक्रमण को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अहम और निर्णायक आदेश जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संबंधित भूमि भारतीय रेलवे की है और उसके उपयोग का अधिकार केवल रेलवे प्रशासन के पास ही रहेगा।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि कोई भी कब्जाधारी यह दावा नहीं कर सकता कि उसे उसी भूमि पर पुनर्वास दिया जाए। हालांकि संभावित विस्थापन से प्रभावित परिवारों को राहत देने के लिए अदालत ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए महत्वपूर्ण निर्देश भी जारी किए।

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कोर्ट ने आदेश दिया कि पहले प्रभावित परिवारों की विधिवत पहचान की जाए। इसके बाद यदि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई होती है तो रेलवे और राज्य सरकार संयुक्त रूप से ऐसे परिवारों को छह माह तक प्रति माह दो हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करेंगे।

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि 19 मार्च को ईद के बाद प्रभावित लोगों के लिए विशेष कैंप आयोजित किए जाएं, ताकि उनकी स्थिति का आकलन कर आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जा सके। साथ ही अगली सुनवाई तक रेलवे भूमि से अतिक्रमण हटाने की किसी भी प्रकार की कार्रवाई पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

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सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि बनभूलपुरा मामले में दी गई अंतरिम राहत उत्तराखंड के अन्य अवैध कब्जों पर स्वतः लागू नहीं होगी। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि रेलवे अपनी भूमि का उपयोग किस प्रकार करेगा, यह निर्णय केवल संबंधित विभाग का अधिकार है, न कि कब्जाधारियों का।

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इस फैसले के बाद हल्द्वानी सहित पूरे प्रदेश में बनभूलपुरा प्रकरण को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में इस मामले की दिशा अब न्यायालय के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगी।

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