ढाई दशक बाद गूंजी कत्यूरों की बैसी :महास्नान, देव अवतरण और जियारानी की जागर. 11 दिवसीय बैसी ने जगाई प्राचीन परंपरा

खबर शेयर करें 👉

द्वाराहाट: उत्तराखंडी लोकसंस्कृति व धार्मिक परंपराओं वाली पौराणिक द्वारका में ढाई दशक बाद कत्यूरों की बैसी (11 दिनों की कड़ी तपस्या से जुड़ी प्राचीन पूजा परंपरा) से पहाड़ से लेकर भाबर तक माहौल भक्तिमय हो उठा है।
विजयपुर धनखल गांव में विशेष देव अनुष्ठान में देवाधिदेव महादेव के साथ ही भूमि, लोक देवी देवताओं की पूजा अर्चना के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु देव डांगरों के साथ रानीबाग स्थित चित्रशिलाघाट के लिए रवाना हुए।
जहां देर शाम कत्यूरी वीरांगना महारानी जिया की जागर। इससे पूर्व गौला (गार्गी) नदी में महास्नान किया गया। बैसी व जागर देखने के लिए हल्द्वानी में बसे कत्यूरी परिवारों के साथ पूर्व केंद्रीय मंत्री व नैनीताल सांसद अजय भट्ट भी पहुंचे।

यह भी पढ़ें 👉  लालकुआं विधानसभा पहुंचे सीएम पुष्कर सिंह धामी, क्षेत्रवासियों को दी बड़ी सौगात; देखें पूरी अपडेट

साधकों के साथ युवा भी धारण किए हैं संन्यास

धनखल गांव में कत्यूर खली व विजयपुर में थान में बीते 16 जुलाई से 28 वर्षों के अंतराल में प्राचीन देव परंपरा बैसी का श्रीगणेश हुआ था। 11 दिनों तक चलने वाले इस अनूठे देव अनुष्ठान में कत्यूरों के सात गांव शामिल हैं। इसमें वयस्क साधकों के साथ युवा भी कड़े नियमों का पालन कर सन्यास धारण किए हैं।

यह भी पढ़ें 👉  लालकुआं नगर पंचायत अध्यक्ष व पूर्व सैनिक सुरेंद्र सिंह लोटनी की पहल से बदली लालकुआं की तस्वीर, सांसद अजय भट्ट ने भव्य प्रवेश द्वार व तिरंगा लाइटों का किया लोकार्पण

इधर शनिवार को कत्यूरी राजवंश की प्रथम महारानी जियारानी के जयकारों के बीच सातों गांवों से श्रद्धालुओं का हुजूम चित्रशिला (हल्द्वानी) के लिए रवाना हुआ। इससे पूर्व ढोल, दमाऊ, हुड़के व कांसे की थाली की गूंज के बीच देव अवतरण कराया गया।

यह भी पढ़ें 👉  हल्द्वानी शादी में 25 लाख खर्च, फिर भी कार की मांग; विवाहिता ने ससुरालियों पर लगाए गंभीर आरोप

उन्होंने ग्रामीणों को आशीर्वाद दे गांव क्षेत्र की खुशहाली का वचन दिया। वहां गौलानदी में महास्नान के बाद जियारानी की जागर के बाद देर रात श्रद्धालु वापस विजयपुर धनखल वापस लौट आए।

ADVERTISEMENTS Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad