किच्छा। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान किच्छा विधानसभा क्षेत्र में आपत्तियां दर्ज कराने के मामलों में बड़ी संख्या में अनियमितताएं सामने आने का दावा किया गया है। भाजपा नेता और बूथ लेवल एजेंट (BLA-02) के नाम से कुल 192 आपत्तियां दर्ज होने की बात सामने आई है। आपत्ति फॉर्म में दर्ज मोबाइल नंबरों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
किच्छा निवासी नितिन भाजपा अनुसूचित मोर्चा के पूर्व जिला महामंत्री और राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के सदस्य हैं। उनके नाम से कुल 147 आपत्तियां दर्ज मिली हैं। खास बात यह है कि इन आपत्ति फॉर्म में दर्ज मोबाइल नंबर मथुरा निवासी हरीश चौधरी के नाम पर पंजीकृत बताया जा रहा है। हरीश चौधरी के अनुसार वह कभी उत्तराखंड नहीं आए हैं।
वहीं, नितिन का वास्तविक मोबाइल नंबर आपत्ति फॉर्म में दर्ज नंबर से केवल एक अंक अलग बताया जा रहा है। नितिन का कहना है कि उन्होंने अपने नाम से एक भी आपत्ति दर्ज नहीं कराई और उनके नाम का दुरुपयोग किया गया है।
BLA-02 के नाम से भी 45 आपत्तियां
किच्छा विधानसभा क्षेत्र के भंगा में बूथ संख्या 146 के BLA-02 खेमकरण भंगा के नाम से भी 45 आपत्तियां दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। उनकी बेटी बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) हैं। इस मामले ने भी SIR के तहत दर्ज आपत्तियों की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।
कई अन्य लोगों के नाम से भी बड़ी संख्या में आपत्तियां
किच्छा के छिनकी निवासी विनीत कुमार गोसाईं के नाम से 120 आपत्तियां दर्ज होने की बात सामने आई है। वहीं इंदरपुर के बूथ संख्या 47 पर आकाश यादव के नाम से 28 आपत्तियां दर्ज हैं।
धर्मेंद्र मणि त्रिपाठी के परिवार के पांच सदस्यों के नाम से सात अगस्त को 18 आपत्तियां दर्ज की गईं। वहीं महाराजपुर निवासी पूर्व जनप्रतिनिधि नरेंद्र ठुकराल के परिवार के चार सदस्यों के नाम से 20 आपत्तियां दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
एक ही नाम पर छह से 147 तक आपत्तियां
किच्छा विधानसभा क्षेत्र में कुछ लोगों के नाम से छह से लेकर 147 तक आपत्तियां दर्ज होने के मामले सामने आए हैं। एक पूर्व जनप्रतिनिधि के पीए के नाम से भी आठ आपत्तियां दर्ज होने की बात कही जा रही है।
कांग्रेस विधायक तिलकराज बेहड़ ने आरोप लगाया कि आपत्तियां दर्ज कराने के पीछे एक गिरोह सक्रिय है और ऐसे लोगों के नाम से भी आपत्तियां लगाई गई हैं, जिन्हें संबंधित व्यक्ति जानते तक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित लोगों को शपथपत्र देना चाहिए, अन्यथा हाईकोर्ट में मामला ले जाकर कार्रवाई की मांग की जाएगी।
हालांकि, आपत्तियां किसने और किस आधार पर दर्ज कराईं, इसकी वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। केवल किसी व्यक्ति के नाम से अधिक संख्या में आपत्तियां दर्ज होने से अपने आप फर्जीवाड़ा साबित नहीं होता।

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