उत्तराखंड में बदल रही मातृत्व की तस्वीर :मां बनने का फैसला टाल रहीं महिलाएं, उत्तराखंड में बढ़ी एग फ्रीजिंग की मांग; हल्द्वानी में भी सुविधा

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देहरादून। अमेरिकी राजनेता एलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज के एग फ्रीजिंग कराने की जानकारी सामने आने के बाद यह तकनीक एक बार फिर चर्चा में है। उत्तराखंड में भी बदलती जीवनशैली, करियर और विवाह व मातृत्व की बदलती प्राथमिकताओं के बीच एग फ्रीजिंग को लेकर रुचि बढ़ रही है। देहरादून के साथ हल्द्वानी में भी इस तकनीक की सुविधा उपलब्ध है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के अनुसार उत्तराखंड में कुल प्रजनन दर 2.1 से घटकर 1.9 बच्चे प्रति महिला रह गई है। वहीं 20-24 वर्ष आयु वर्ग में प्रजनन दर 0.175 से घटकर 0.143 हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार शिक्षा, रोजगार और करियर के कारण महिलाओं में विवाह और मातृत्व की योजना पहले की तुलना में आगे खिसक रही है।

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ऐसे में भविष्य में मां बनने की संभावना को सुरक्षित रखने के लिए एग फ्रीजिंग यानी अंडाणुओं को सुरक्षित रखने की तकनीक एक विकल्प के रूप में सामने आ रही है। उत्तराखंड में देहरादून और हल्द्वानी समेत कुछ निजी आईवीएफ केंद्रों में इसकी सुविधा उपलब्ध है।

25 सहायक प्रजनन तकनीक केंद्र पंजीकृत, पांच में एग फ्रीजिंग

उत्तराखंड में 25 सहायक प्रजनन तकनीक (ART) केंद्र पंजीकृत हैं। इनमें देहरादून के तीन, हरिद्वार के एक और हल्द्वानी के एक केंद्र में एग फ्रीजिंग की सुविधा उपलब्ध होने की जानकारी सामने आई है।

भविष्य के लिए सुरक्षित किए जाते हैं अंडाणु

एग फ्रीजिंग को चिकित्सकीय भाषा में ओसाइट क्रायोप्रिजर्वेशन कहा जाता है। इस प्रक्रिया में महिला के अंडाणुओं को निकालकर बेहद कम तापमान पर सुरक्षित रखा जाता है। भविष्य में जब महिला गर्भधारण की योजना बनाती है, तो इन अंडाणुओं को शुक्राणु से निषेचित कर भ्रूण तैयार किया जा सकता है। इसके बाद भ्रूण को आईवीएफ प्रक्रिया के माध्यम से गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है।

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उम्र के साथ घटती है अंडाणुओं की गुणवत्ता

एग फ्रीजिंग में महिला की उम्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उम्र बढ़ने के साथ अंडाणुओं की संख्या और गुणवत्ता में स्वाभाविक रूप से कमी आती है। ऐसे में अपेक्षाकृत कम उम्र में सुरक्षित किए गए अंडाणुओं से भविष्य में गर्भधारण की संभावना बेहतर हो सकती है। हालांकि, एग फ्रीजिंग को भविष्य में मातृत्व की गारंटी नहीं माना जा सकता।

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विशेषज्ञों के अनुसार महिला की उम्र, स्वास्थ्य और ओवेरियन रिजर्व समेत कई कारकों को ध्यान में रखते हुए ही इस प्रक्रिया का निर्णय लिया जाना चाहिए। इसके लिए विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है।

डॉ. सुनीता टम्टा, महानिदेशक, स्वास्थ्य, के अनुसार एग फ्रीजिंग आधुनिक चिकित्सा तकनीक है, जो महिलाओं को भविष्य की प्रजनन योजना के लिए एक विकल्प उपलब्ध कराती है। हालांकि, इसे मातृत्व की गारंटी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

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