देहरादून। हिमाचल प्रदेश के धौलाधार वन्यजीव अभयारण्य में पहली बार हिम तेंदुए की कैमरा ट्रैप के जरिए तस्वीर दर्ज की गई है। इसे अभयारण्य के इतिहास में हिम तेंदुए की पहली वैज्ञानिक फोटोग्राफिक पुष्टि माना जा रहा है। खास बात यह है कि हिम तेंदुआ वर्षों से अभयारण्य के आधिकारिक प्रतीक (लोगो) का हिस्सा रहा है, लेकिन अब तक इसकी मौजूदगी का कोई प्रत्यक्ष फोटोग्राफिक प्रमाण नहीं मिला था। अपनी दुर्लभ उपस्थिति के कारण हिम तेंदुए को ‘घोस्ट ऑफ माउंटेन्स’ (पहाड़ों का भूत) भी कहा जाता है।
यह महत्वपूर्ण उपलब्धि भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जेडएसआई), भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई), देहरादून और हिमाचल प्रदेश वन विभाग के संयुक्त अध्ययन के दौरान कैमरा ट्रैप के माध्यम से हासिल हुई।
शोधकर्ताओं के अनुसार कैमरे में कैद हुआ हिम तेंदुआ संभवतः इस क्षेत्र का स्थायी निवासी नहीं था, बल्कि ऊंचाई वाले संरक्षित क्षेत्रों के बीच आने-जाने वाले वन्यजीव कॉरिडोर का उपयोग कर रहा था। यह खोज इस बात का संकेत देती है कि धौलाधार वन्यजीव अभयारण्य हिमालयी वन्यजीवों के लिए एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग की भूमिका निभा रहा है।
इस खोज के साथ धौलाधार वन्यजीव अभयारण्य अब चार शीर्ष शिकारी वन्यजीवों वाला संरक्षित क्षेत्र बन गया है। यहां हिम तेंदुआ, हिमालयी भूरा भालू, एशियाई काला भालू और सामान्य तेंदुआ—चारों की वैज्ञानिक रूप से उपस्थिति दर्ज हो चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी पारिस्थितिकी तंत्र में इतने शीर्ष शिकारी प्रजातियों का होना वहां की समृद्ध जैव विविधता और संतुलित खाद्य श्रृंखला का संकेत है।
हिम तेंदुआ भारत की संकटग्रस्त वन्यजीव प्रजातियों में शामिल है। वर्ष 2024 में जारी देश की पहली वैज्ञानिक गणना के अनुसार भारत में हिम तेंदुओं की अनुमानित संख्या 718 है, जिनमें से 51 हिम तेंदुए हिमाचल प्रदेश में दर्ज किए गए थे।


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