रामनगर/हल्द्वानी। गर्मी और उमस के बाद अब बरसात के मौसम में सर्पदंश की घटनाएं चिंता बढ़ा रही हैं। रामनगर वन प्रभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की कुल 73 घटनाएं सामने आई हैं। इनमें 52 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। वहीं, सर्पदंश के 36 मामले दर्ज किए गए, जिनमें चार लोगों की मौत हुई। कुल 32 लोगों को मुआवजा भी दिया गया है।
रामनगर वन प्रभाग के उप प्रभागीय वनाधिकारी अंकित बडोला ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में बाघ के हमलों की तुलना में सर्पदंश की घटनाएं अधिक सामने आई हैं। बरसात के दौरान सांपों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं, ऐसे में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
एसटीएच में सर्पदंश के चार मरीज भर्ती
हल्द्वानी स्थित डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल (एसटीएच) में वर्तमान में सर्पदंश के चार मरीजों का इलाज चल रहा है। इनमें खटीमा निवासी 16 वर्षीय बालक को आठ अगस्त को भर्ती कराया गया था। चोरगलिया निवासी 45 वर्षीय व्यक्ति को 13 अगस्त को कोबरा के काटने के बाद अस्पताल लाया गया। बाजपुर निवासी 30 वर्षीय मरीज को 16 अगस्त को भर्ती कराया गया। वहीं, 60 वर्षीय महिला भी 16 अगस्त से अस्पताल में भर्ती हैं। इन सभी मरीजों को पैर में सांप ने काटा था।
झाड़-फूंक में तीन दिन की देरी, गुर्दे पर पड़ा असर
करीब एक सप्ताह पहले खैरना निवासी 35 वर्षीय व्यक्ति को सांप ने काट लिया था। सर्पदंश के बाद वह तीन दिन तक अस्पताल नहीं पहुंचे और झाड़-फूंक कराते रहे। अस्पताल पहुंचने तक उनकी हालत गंभीर हो चुकी थी। चिकित्सकों के अनुसार, इलाज में देरी के कारण उनके गुर्दे को गंभीर नुकसान पहुंचा।
हल्दूचौड़ की महिला के गुर्दे पर भी असर
करीब पांच दिन पहले हल्दूचौड़ निवासी एक महिला को रात के समय सड़क पर सांप ने डस लिया। इसके बाद परिजन उन्हें पहले स्थानीय स्तर पर झाड़-फूंक कराने ले गए, जिससे अस्पताल पहुंचने में देरी हुई। हालत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल लाया गया। चिकित्सकों के अनुसार, इलाज में देरी के कारण महिला के गुर्दे पर भी असर पड़ा है।
चिकित्सकों का कहना है कि सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय गंवाने के बजाय पीड़ित को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाना चाहिए।
फ़ोटो परिचय गूगल द्वारा ली गई है

लेटेस्ट न्यूज़ अपडेट के लिए -
www.devbhumionline.com
