लालकुआं। नगर में कुमाऊं के लोकपर्व सातूं-आठूं की धूम देखने को मिली। गांधी नगर वार्ड नंबर-2 स्थित मुन्नी पांडेय के आवास से गौरा-महेश की शोभायात्रा पारंपरिक ढोल-दमाऊ की थाप के साथ निकाली गई। शोभायात्रा लालकुआं के मुख्य बाजार से होते हुए फलहारी बाबा मंदिर, हाथीखाना पहुंची।
शोभायात्रा में बड़ी संख्या में नगर की महिलाएं कुमाऊंनी पारंपरिक परिधान और पिछौड़ा पहनकर शामिल हुईं। महिलाओं ने मंगल गीत गाते हुए लोकपर्व की खुशियां साझा कीं। फलहारी बाबा मंदिर पहुंचने के बाद विधि-विधान के साथ गौरा और महेश यानी माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान भजन-कीर्तन का भी आयोजन हुआ, जिसमें महिलाओं ने श्रद्धा और उत्साह के साथ भाग लिया।
सातूं-आठूं कुमाऊं की समृद्ध लोकसंस्कृति और परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। इसमें गौरा को माता पार्वती और महेश को भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है। परंपरा के अनुसार सप्तमी के दिन गौरा और अष्टमी के दिन महेश की पूजा की जाती है। पर्व के दौरान महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि, अखंड सौभाग्य और संतान के कल्याण की कामना करती हैं।
इस पर्व की शुरुआत बिरुड़ पंचमी से मानी जाती है, जब गेहूं, चना, गहत, मटर सहित विभिन्न अनाजों को भिगोया जाता है। आगे चलकर इन्हीं बिरुड़ों को गौरा-महेश की पूजा में अर्पित किया जाता है। पर्व में कुमाऊंनी लोकगीत, झोड़ा, चांचरी और भजन-कीर्तन की भी विशेष परंपरा है।
आयोजन में सभासद दीप्ति हेमंत पांडे, सभासद नेहा आर्य, गीता भट्ट, बबीता भट्ट, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हेमवती नंदन दुर्गापाल, व्यापार मंडल महिला उपाध्यक्ष मीना रावत, शोभा जोशी, गीता पांडे, मुन्नी पांडे, चंपा बिष्ट, रजनी भंडारी, प्रेमा आर्या, दीपा बिष्ट, मीना बोरा और टीना बिष्ट,मीनू जीना,हेमन्त पांडेय समेत बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं।
लालकुआं में आयोजित कार्यक्रम ने नगर में पहाड़ की लोकसंस्कृति और परंपराओं की खूबसूरत झलक पेश की। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं, ढोल-दमाऊ की गूंज और गौरा-महेश के जयकारों से पूरा माहौल भक्तिमय और उत्सवमय नजर आया। बड़ी संख्या में महिलाओं की मौजूदगी ने आयोजन की रौनक और बढ़ा दी।

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