रानीखेत। नगर से सटे सुंदरखाल के घने जंगल में छह दिन पहले लापता हुई 28 वर्षीय दिव्यांग एवं मानसिक रूप से कमजोर युवती आखिरकार सकुशल मिल गई। युवती को खोजने के लिए पुलिस ने ड्रोन उड़ाए, नैनीताल से डॉग स्क्वायड बुलाया गया और पुलिस, एसडीआरएफ व अग्निशमन विभाग की टीमों ने कई दिनों तक जंगल की खाक छानी। आखिरकार वह जंगल से गुजर रही नदी के किनारे भजन गाते हुए मिली।
हैरानी की बात यह रही कि युवती ने छह दिन तक जंगल में ही गुजारे। उसने भूख लगने पर मीठी पत्ती (तेजपात) और अन्य पत्ते चबाकर पेट भरा, जबकि प्यास बुझाने के लिए प्राकृतिक जलस्रोतों का पानी पिया। रात के समय जंगली जानवरों के बीच उसने प्रभु का भजन गाकर हिम्मत बनाए रखी। उसके सकुशल मिलने को ग्रामीण किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं, वहीं पुलिस और राहत टीमों के लगातार प्रयासों की भी सराहना की जा रही है।
एक जुलाई से थी लापता
घटना एक जुलाई की शाम की है। मजखाली निवासी गिरीश चंद्र पुजारी अपनी 28 वर्षीय पुत्री विधि को रोज की तरह घूमाने सुंदरखाल के जंगल की ओर ले गए थे। लौटते समय थकान के कारण विधि कुछ देर के लिए रुक गई, जबकि उसके पिता धीरे-धीरे आगे बढ़ गए। करीब 20 मिनट बाद जब उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तो बेटी दिखाई नहीं दी। काफी आवाज लगाने और तलाश करने के बावजूद उसका कोई पता नहीं चला। मौके पर उसकी चप्पलें मिलीं, लेकिन युवती का कोई सुराग नहीं मिला।
ग्रामीणों की मदद से काफी खोजबीन की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद तीन जुलाई को मजखाली चौकी में गुमशुदगी दर्ज कराई गई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर नैनीताल से डॉग स्क्वायड बुलाया गया। एएसपी हरबंश सिंह के नेतृत्व में पुलिस, एसडीआरएफ और दमकल विभाग की टीमों ने लगातार जंगल में सर्च ऑपरेशन चलाया।
भजन की आवाज बनी सुराग
बुधवार शाम सुंदरखाल और बटुलिया क्षेत्र की कुछ महिलाएं बाजार से लौट रही थीं। तभी नदी की ओर से किसी युवती के भजन गाने की आवाज सुनाई दी। वह बीच-बीच में “हर-हर गंगे”, “जय श्रीकृष्ण” और “भारत माता की जय” के जयकारे भी लगा रही थी।
महिलाओं को शक हुआ कि यह वही लापता युवती हो सकती है। उन्होंने तुरंत गांव और परिजनों को सूचना दी। युवती के पिता गिरीश चंद्र मौके पर पहुंचे और पुलिस को भी जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने युवती को सकुशल रेस्क्यू कर लिया।
पत्ते खाकर मिटाई भूख
पिता के अनुसार, विधि ने बताया कि जंगल में उसने मीठी पत्ती (तेजपात) और पान जैसे पत्ते खाकर भूख मिटाई तथा प्राकृतिक जलस्रोतों का पानी पीकर प्यास बुझाई। उसने बैंगन का भर्ता और रोटी खाने की बात भी कही, जिससे संभावना जताई जा रही है कि किसी ग्रामीण ने उसे भोजन कराया होगा।
एएसपी हरबंश सिंह ने बताया कि युवती के नंगे पैर जंगल में चलने से पैरों में छाले पड़ गए थे और शरीर पर हल्की खरोंचें थीं। प्राथमिक उपचार के बाद उसकी हालत सामान्य है। छह दिन तक घने जंगल में रहने के बावजूद युवती का सकुशल मिलना राहत की बात है।

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