10 बार मौत को दी दस्तक, 10 बार पुलिस ने बचाया. हर बार फूल पर चढ़कर आत्महत्या की धमकी दे चुका है सनी, पुलिस और समाज दोनों परेशान

खबर शेयर करें 👉

बागेश्वर। हर बार जब सनी किसी पुल की रेलिंग पर चढ़ता है तो लोगों की सांसें थम जाती हैं। कोई उसका वीडियो बनाने लगता है, कोई 112 पर फोन करता है और कुछ ही देर में पुलिस मौके पर पहुंच जाती है। घंटों की मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित नीचे उतार लिया जाता है। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। कुछ दिन बाद वही सनी फिर किसी पुल पर चढ़ा नजर आता है।

नगर के घटबगड़ निवासी 30 वर्षीय सनी पिछले छह महीनों में 10 से अधिक बार ऐसी हरकत कर चुका है। कभी वह पुल की रेलिंग पर बैठ जाता है, कभी वहीं लेट जाता है और कभी नदी में कूदने की धमकी देता है। हर बार मौके पर भीड़ जुट जाती है और उसके वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल होने लगते हैं, लेकिन उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी जरूरत—इलाज और पुनर्वास—अब तक पूरी नहीं हो सकी है।

यह भी पढ़ें 👉  (काम की खबर) 20 अक्टूबर तक खुटानी-धानाचूली मार्ग पर रोज पांच घंटे आवाजाही रहेगी बंद, यात्रियों को 40 किमी अतिरिक्त सफर

नशे की गिरफ्त में है सनी

सनी के माता-पिता का निधन हो चुका है और उसकी देखभाल करने वाला कोई नजदीकी परिजन भी नहीं है। पुलिस ने उसके रिश्तेदारों का पता लगाने का काफी प्रयास किया, लेकिन कोई ऐसा व्यक्ति सामने नहीं आया जो उसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार हो। यही कारण है कि उसे मानसिक चिकित्सालय या नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती कराने में बड़ी परेशानी आ रही है।

जानकारी के अनुसार सनी कभी-कभी होटलों में बर्तन साफ करने या छोटे-मोटे काम करके कुछ पैसे कमा लेता है। लेकिन मजदूरी मिलते ही वह नशे का सेवन करने लगता है, जिसके बाद उसकी आत्मघाती हरकतें फिर शुरू हो जाती हैं। पुलिस दो बार उसकी काउंसलिंग भी करा चुकी है, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। कुछ समय तक पुलिस उसे अपने संरक्षण में रखती है, फिर छोड़ना पड़ता है। कुछ दिन शांत रहने के बाद वह फिर किसी पुल पर चढ़ जाता है।

यह भी पढ़ें 👉  कैंची धाम में दर्शन को आए गुड़गांव के श्रद्धालुओं से मारपीट, लोहे की रॉड-डंडों से हमला

केवल सनी ही नहीं, बल्कि नगर में करीब 10 मानसिक रूप से अस्वस्थ और बेसहारा लोग खुलेआम घूम रहे हैं। कई बार वे राहगीरों से अभद्रता करते हैं, गाली-गलौज करते हैं या लोगों पर सामान फेंक देते हैं। इनमें दो युवतियां और एक महिला भी शामिल हैं। शिकायत मिलने पर पुलिस उन्हें समझाकर वहां से हटाती है, लेकिन इलाज और पुनर्वास की व्यवस्था नहीं होने से समस्या जस की तस बनी हुई है।

जिले में कई स्वयंसेवी संस्थाएं और समाजसेवी सक्रिय हैं, लेकिन मानसिक रूप से असहाय और बेसहारा लोगों के पुनर्वास के लिए अब तक कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर ऐसे लोगों की जिम्मेदारी कौन उठाएगा?

क्या कहते हैं कोतवाल

कोतवाल अनिल उपाध्याय ने बताया कि सनी पिछले छह महीनों में 10 से अधिक बार पुल पर चढ़ चुका है। हर बार पुलिस ने उसे सुरक्षित नीचे उतारा है और दो बार उसकी काउंसलिंग भी कराई गई है।

यह भी पढ़ें 👉  लालकुआं को भूमिधरी अधिकार, पंतनगर एयरपोर्ट के लिए ₹66.29 करोड़: बनबसा कैबिनेट में 24 फैसलों पर मुहर कुमाऊं को बड़ी सौगात

उन्होंने बताया कि बिना अभिभावक के मानसिक चिकित्सालय या नशा मुक्ति केंद्र ऐसे लोगों को भर्ती नहीं करते, जिससे पुलिस के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो जाती है। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले एक नेपाली युवक भी इसी तरह की हरकतें कर रहा था। पुलिस ने अपने खर्च पर करीब पांच हजार रुपये खर्च कर उसे सकुशल नेपाल पहुंचाया था।

यह मामला केवल एक युवक का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का आईना है, जहां मानसिक बीमारी, नशे की लत और बेघरपन मिलकर किसी इंसान को समाज के बीच पूरी तरह अकेला छोड़ देते हैं। हर बार पुलिस सनी को पुल से सुरक्षित उतार लेती है, लेकिन उसे अब तक वह जिंदगी नहीं मिल सकी है, जहां इलाज, सहारा और सम्मान तीनों एक साथ मिल सकें।

ADVERTISEMENTS Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad