उत्तराखंड में 26 अक्टूबर से मिठाई-बेकरी पर नया नियम लागू, अब ट्रे और काउंटर पर लिखनी होगी निर्माण व एक्सपायरी डेट

Oplus_16908288

खबर शेयर करें 👉

देहरादून। त्योहारों और शादी-विवाह के सीजन में मिठाई खरीदने वाले ग्राहकों के लिए राहत भरी खबर है। अब उत्तराखंड में खुली मिठाइयां और बेकरी उत्पाद खरीदते समय ग्राहक उनकी निर्माण तिथि और उपयोग की अंतिम तिथि की जानकारी भी ले सकेंगे। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने 26 अक्टूबर से प्रदेशभर में खुली मिठाइयों और बेकरी उत्पादों पर निर्माण तिथि तथा एक्सपायरी डेट या ‘यूज बाई डेट’ प्रदर्शित करना अनिवार्य कर दिया है। खाद्य सुरक्षा आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं।

खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से मिठाई की दुकानों के निरीक्षण के दौरान सामने आया कि खुली मिठाइयों के निर्माण और उनके उपयोग की अंतिम तिथि की जानकारी ग्राहकों को नहीं मिल पा रही थी। दुकानों में मिठाइयां बिक्री के लिए सजी रहती थीं, लेकिन ग्राहकों को यह पता नहीं चल पाता था कि मिठाइयां कब बनाई गई हैं और उन्हें कितने समय तक खाना सुरक्षित है।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड में महानवमी पर 19 अक्टूबर को उत्तराखंड में सार्वजनिक अवकाश घोषित, सीएम धामी ने दी शुभकामनाएं

विभाग के अनुसार, मिठाइयों और बेकरी उत्पादों की उपयोग अवधि उनकी प्रकृति, सामग्री और भंडारण की स्थिति के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। कुछ मिठाइयां कम समय तक उपयोग योग्य रहती हैं, जबकि कुछ उत्पादों की अवधि 30 दिन तक हो सकती है। ऐसे में ग्राहकों को सही जानकारी उपलब्ध कराने के लिए निर्माण तिथि और उपयोग की अंतिम तिथि प्रदर्शित करना जरूरी है।

खाद्य सुरक्षा आयुक्त विनय शंकर पांडेय के अनुसार, यह निर्णय खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के तहत उपभोक्ताओं के हितों और जनस्वास्थ्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

ट्रे और काउंटर पर स्पष्ट रूप से दिखानी होंगी तारीखें

नए नियम के तहत दुकानदारों को बिक्री के लिए रखी खुली मिठाइयों और बेकरी उत्पादों की ट्रे या काउंटर पर निर्माण तिथि और एक्सपायरी डेट अथवा ‘यूज बाई डेट’ स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करनी होगी। यह व्यवस्था पूरे उत्तराखंड में लागू होगी। इसका उद्देश्य ग्राहकों को खाद्य पदार्थों की ताजगी और उपयोग अवधि के बारे में जानकारी देना तथा बिक्री प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना है।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड में दिन में चटख धूप, सुबह-शाम बढ़ने लगी ठंड; 23 अक्टूबर से बदल सकता है मौसम

आमतौर पर मिठाइयों की उपयोग अवधि

मिठाइयों की उपयोग अवधि उनकी सामग्री, नमी, निर्माण प्रक्रिया और भंडारण की स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। सामान्य तौर पर विभिन्न मिठाइयों की अवधि इस प्रकार बताई जाती है:

एक दिन: कलाकंद, चॉकलेट कलाकंद।

दो दिन: दूध से बने उत्पाद और बंगाली मिठाइयां, जैसे रसगुल्ला, रसमलाई, रबड़ी, राजभोग, चमचम, मलाई रोल और बंगाली रबड़ी।

यह भी पढ़ें 👉  बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने की मांग पर 17वें दिन भी अनशन जारी, सरकार की चुप्पी पर बरसे सईद सिद्दीकी

चार दिन: लड्डू, खोया मिठाइयां, मिल्क केक, बर्फी, बूंदी के लड्डू, नारियल के लड्डू, मोतीचूर के लड्डू, मोदक, फ्रूट केक और घेवर।

सात दिन: घी और ड्राई फ्रूट से बनी मिठाइयां, काजू कतली, शक्करपारा, गुड़पारा, शाही लड्डू, मूंग बर्फी, आटे के लड्डू, ड्राई फ्रूट गुजिया, काजू केसर बर्फी, काजू रोल, खजूर से बनी मिठाइयां, बेसन बर्फी, बालूशाही, काजू-अंजीर और अंजीर केक।

30 दिन तक: आटे के लड्डू, बेसन के लड्डू, चने के लड्डू, चने की बर्फी, अंजीर-खजूर बर्फी और सोहन हलवा आदि।

ध्यान दें: मिठाइयों की ऊपर दी गई उपयोग अवधि सामान्य जानकारी पर आधारित है। वास्तविक उपयोग अवधि उत्पाद की प्रकृति, निर्माण प्रक्रिया, सामग्री और भंडारण पर निर्भर करती है। ग्राहकों को संबंधित उत्पाद पर प्रदर्शित तारीख को ही प्राथमिकता देनी चाहिए।

फ़ोटो परिचय:- सांकेतिक फ़ोटो

ADVERTISEMENTS Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad