हल्द्वानी। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में हल्द्वानी नगर निगम क्षेत्र से लिए गए दूध के पांच नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। राज्य खाद्य प्रयोगशाला, रुद्रपुर से आई जांच रिपोर्ट में इन नमूनों में मिल्क फैट और/या सॉलिड नॉट फैट (एसएनएफ) की मात्रा निर्धारित मानकों से कम पाई गई। विभाग ने सभी नमूनों को अवमानक घोषित करते हुए संबंधित खाद्य कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई शुरू कर दी है।
जिलाधिकारी नैनीताल के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ने बीती पांच अगस्त को हल्द्वानी नगर निगम क्षेत्र में विभिन्न दूध वितरकों से नमूने लिए थे। टीम में सहायक आयुक्त एएस रावत और वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी अभय कुमार सिंह शामिल रहे। नमूनों को जांच के लिए राज्य खाद्य प्रयोगशाला, रुद्रपुर भेजा गया था।
प्रयोगशाला की रिपोर्ट के अनुसार परम स्टैंडर्ड मिल्क में मिल्क फैट 3.75 प्रतिशत मिला, जबकि निर्धारित मानक 4.5 प्रतिशत है। मधुसूदन काऊ मिल्क में फैट 3.11 प्रतिशत और एसएनएफ आठ प्रतिशत पाया गया, जबकि निर्धारित मानक क्रमश: 3.2 और 8.3 प्रतिशत है। हेल्थवेज स्टैंडर्ड मिल्क में फैट 4.27 प्रतिशत और एसएनएफ 7.21 प्रतिशत मिला, जबकि मानक क्रमश: 4.5 और 8.5 प्रतिशत है।
इसी तरह गाय और भैंस के खुले मिश्रित दूध के नमूने में मिल्क फैट महज 2.96 प्रतिशत और एसएनएफ 6.59 प्रतिशत पाया गया। वहीं मदर डेयरी काऊ मिल्क में मिल्क फैट 3.04 प्रतिशत मिला, जबकि निर्धारित न्यूनतम मानक 3.2 प्रतिशत है।
रासायनिक मिलावट नहीं मिली
हालांकि राहत की बात यह है कि प्रयोगशाला जांच में नमूनों में स्टार्च, यूरिया, नमक, न्यूट्रलाइजर, शुगर और कृत्रिम सिंथेटिक रंग जैसी मिलावट नहीं पाई गई। इसके बावजूद मिल्क फैट और एसएनएफ निर्धारित मानकों से कम होने के कारण नमूनों को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत अवमानक घोषित किया गया है। संबंधित कारोबारियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
क्या है फैट और एसएनएफ की कमी का असर
दूध में फैट और एसएनएफ उसकी पोषण गुणवत्ता के महत्वपूर्ण घटक हैं। एसएनएफ में मुख्य रूप से प्रोटीन, लैक्टोज और खनिज पदार्थ शामिल होते हैं। इसलिए निर्धारित मानक से कम मात्रा मिलने का मतलब है कि संबंधित दूध अपेक्षित पोषण गुणवत्ता पर खरा नहीं उतरा।

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