उत्तराखंड में फिर पकड़ी गई नकली दवा फैक्टरी, देवभूमि में बढ़ता फर्जी दवा सिंडिकेट बना बड़ा खतरा

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देहरादून। उत्तराखंड में नकली दवाओं का कारोबार अब केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। देहरादून में एक बार फिर नकली दवा बनाने वाली फैक्टरी का भंडाफोड़ होने के बाद यह सवाल उठने लगा है कि आखिर बार-बार ऐसे रैकेट कैसे सक्रिय हो रहे हैं।
देहरादून से लेकर रुड़की, भगवानपुर, सेलाकुई, कोटद्वार और बाजपुर तक हुई कार्रवाई यह संकेत देती है कि नकली दवा सिंडिकेट लगातार अपने ठिकाने बदल रहा है। फैक्ट्रियां बदल रही हैं, लेकिन कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा। इसका सबसे बड़ा खतरा उन मरीजों पर है, जिन्हें इलाज के नाम पर नकली दवाएं मिल सकती हैं।


इलाज के नाम पर मौत का सौदा
बुधवार को उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के ड्रग विभाग की संयुक्त कार्रवाई में देहरादून में एक ऐसी फैक्टरी का खुलासा हुआ, जहां नामी दवा कंपनियों के नाम पर नकली दवाएं तैयार की जा रही थीं। इससे पहले भी उत्तराखंड एसटीएफ और पुलिस कई बड़े गिरोहों का पर्दाफाश कर चुकी है।

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जांच में पहले सामने आ चुका है कि उत्तराखंड में तैयार नकली दवाओं की सप्लाई उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ तक की जा रही थी। इससे साफ है कि यह नेटवर्क प्रदेश की सीमाओं से कहीं आगे तक फैला हुआ है।


गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में सामने आए अधिकांश बड़े नकली दवा नेटवर्क एसटीएफ और पुलिस की कार्रवाई में ही उजागर हुए हैं। वहीं, दवा निर्माण इकाइयों की निगरानी, निरीक्षण और सैंपलिंग की जिम्मेदारी निभाने वाला ड्रग विभाग भी हर खुलासे के बाद सवालों के घेरे में आ जाता है।


फार्मा हब के साथ बढ़ा फर्जी दवा नेटवर्क
उत्तराखंड को फार्मा उद्योग का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए सरकार ने हरिद्वार, भगवानपुर, रुड़की, सेलाकुई और कोटद्वार जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में विशेष सुविधाएं दीं। इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में दवा निर्माण इकाइयां स्थापित हुईं, लेकिन समय-समय पर यहीं नकली दवाओं के निर्माण और पैकिंग के मामले भी सामने आते रहे हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार गिरोह नामी कंपनियों के रैपर, होलोग्राम, क्यूआर कोड और पैकेजिंग की हूबहू नकल तैयार कर बाजार में नकली दवाएं उतार रहे थे।
गंभीर बीमारियों की दवाएं भी बनाई गईं
पहले की जांच में सामने आया था कि गिरोह कैंसर, ब्लड प्रेशर, संक्रमण, दर्द, गठिया और मिर्गी जैसी गंभीर बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की भी नकली खेप तैयार कर रहे थे। पैकिंग इतनी सटीक होती थी कि कई बार असली और नकली दवा में अंतर करना मुश्किल हो जाता था। यही कारण है कि विशेषज्ञ इसे आर्थिक अपराध के साथ-साथ जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा मानते हैं।

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बॉक्स-1 : उत्तराखंड में कहां-कहां पकड़े गए नकली दवा नेटवर्क
देहरादून
रुड़की
भगवानपुर
सेलाकुई
कोटद्वार
बाजपुर
जांच में खुलासा: उत्तराखंड से तैयार नकली दवाओं की सप्लाई उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ तक की जा रही थी।

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बॉक्स-2 : क्यों है नकली दवा सिंडिकेट सबसे बड़ा खतरा?
इलाज के बजाय मरीज की जान को खतरा।
कैंसर, ब्लड प्रेशर, संक्रमण, गठिया और मिर्गी जैसी गंभीर बीमारियों की नकली दवाएं भी तैयार।
ब्रांडेड कंपनियों जैसी पैकेजिंग, होलोग्राम और क्यूआर कोड की नकल।
सोशल मीडिया के जरिए ग्राहकों तक पहुंच और कूरियर से देशभर में सप्लाई।
विशेषज्ञों के अनुसार केवल फैक्टरी सील करना पर्याप्त नहीं, पूरे नेटवर्क और सप्लाई चेन पर कार्रवाई जरूरी।

नोट:- फ़ोटो परिचय (AI द्वारा निर्मित)

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