हरिद्वार। साइबर ठगी के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले आरोपितों ने लोकप्रिय क्राइम वेब सीरीज ‘जामताड़ा’ की तर्ज पर हरिद्वार में गैंग चला रखा था। गैंग में शामिल सदस्यों को ज्यादा से ज्यादा बैंक खाते उपलब्ध कराने के लिए क्षेत्रवार जिम्मेदारियां बांटकर टारगेट दिए जाते थे। इसके बदले उन्हें साइबर ठगी की रकम का 10 प्रतिशत कमीशन मिलता था।
पुलिस की गिरफ्त में आए पांचों आरोपितों की उम्र महज 20 से 24 वर्ष के बीच है। कम उम्र के बावजूद वे साइबर अपराध के इस नेटवर्क में अलग-अलग भूमिकाएं निभा रहे थे। गैंग का सरगना कृष्णा पांडे बीटेक पास है, जबकि अन्य आरोपित 12वीं तक पढ़े हैं। वहीं, चंद्रमणि हरकी पैड़ी पर पंडिताई भी कर चुका है।
पुलिस को आरोपितों के बैंक स्टेटमेंट, केवाईसी, ट्रांजेक्शन हिस्ट्री और बरामद डिजिटल उपकरणों की जांच से साइबर अपराध से जुड़ी पूरी मनी ट्रेल सामने आने की उम्मीद है।
पुलिस के अनुसार, गैंग के सदस्य आम लोगों को दो से चार हजार रुपये का लालच देकर उनके बैंक खाते हासिल करते थे। उन्हें बताया जाता था कि वे ऑनलाइन गेम खेलते हैं और उसमें जीती गई रकम इन खातों में मंगानी है। लालच में आकर कई लोग ऐसे बैंक खाते भी उपलब्ध करा देते थे, जिनका वे लंबे समय से इस्तेमाल नहीं कर रहे थे।
जांच में सामने आया है कि कृष्णा पांडे पूरे गैंग को लीड करता था। वहीं, चंद्रमणि घर से ही गैंग के सदस्यों द्वारा उपलब्ध कराए गए बैंक खातों की यूपीआई आईडी जनरेट करता था। पुलिस अब खाताधारकों, म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वालों और इस नेटवर्क के मुख्य संचालकों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
‘जामताड़ा’ की तर्ज पर चल रहा था नेटवर्क
लोकप्रिय क्राइम ड्रामा वेब सीरीज ‘जामताड़ा’ में झारखंड के जामताड़ा जिले के युवाओं द्वारा देशभर में साइबर ठगी करने का नेटवर्क दिखाया गया है। हरिद्वार में पकड़े गए कृष्णा पांडे, चंद्रमणि और चंदन पांडे का नेटवर्क भी इसी तरह बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों के जरिए साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर करने में सक्रिय था।
कृष्णा और चंदन मौसेरे भाई
मूलरूप से बिहार निवासी कृष्णा पांडे, चंद्रमणि और चंदन हरिद्वार में रह रहे थे। कृष्णा और चंदन पांडे आपस में मौसेरे भाई हैं। दोनों नालंदा के रहने वाले हैं, जबकि उनका ननिहाल नवादा में चंद्रमणि के गांव में है। ननिहाल आने-जाने के दौरान तीनों की दोस्ती हुई और बाद में उन्होंने गैंग बनाकर साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क के लिए काम करना शुरू कर दिया।
पुलिस की जांच में सामने आया है कि चंद्रमणि का संपर्क बिहार में सक्रिय साइबर ठगी के बड़े सरगनाओं से था। ठगी की रकम के बंटवारे को लेकर कृष्णा और चंद्रमणि के बीच विवाद भी हुआ था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इसी विवाद के बाद मामले की जांच में कई महत्वपूर्ण कड़ियां सामने आईं।
पुलिस अब आरोपितों से जुड़े बैंक खातों, यूपीआई आईडी, डिजिटल उपकरणों और लेनदेन की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद साइबर ठगी के इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और ठगी की रकम की वास्तविक मनी ट्रेल का खुलासा होने की संभावना है।
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