रामनगर। उत्तराखंड के एक प्रोफेसर के साथ फास्टैग धोखाधड़ी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। प्रोफेसर की कार उत्तराखंड की सड़कों पर चल रही है, जबकि उनके फास्टैग से हजारों किलोमीटर दूर तमिलनाडु में टोल टैक्स कट रहा है। एक-दो बार नहीं, बल्कि अलग-अलग दिनों में पांच बार ऐसा हो चुका है। परेशान प्रोफेसर ने अब पुलिस से मामले में कार्रवाई की गुहार लगाई है।
पांच बार तमिलनाडु में कटा टोल
रामनगर के लुटाबड़ गांव निवासी अधीर कुमार पीएलएमएस परिसर, ऋषिकेश स्थित श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में प्रोफेसर हैं। वह छुट्टियों के दौरान रामनगर आते-जाते रहते हैं। प्रोफेसर के अनुसार, वह पिछले करीब तीन वर्षों से अपनी कार में फास्टैग का इस्तेमाल कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि इस साल मई में पहली बार उनके फास्टैग से तमिलनाडु में टोल टैक्स कटने का संदेश आया। इसके बाद अलग-अलग दिनों में अब तक पांच बार तमिलनाडु में उनके फास्टैग से टोल शुल्क काटा जा चुका है, जबकि उन तारीखों में उनकी कार उत्तराखंड में थी।
पुलिस को दी लिखित शिकायत
मामले से परेशान प्रोफेसर रविवार को रामनगर कोतवाली पहुंचे और पुलिस को लिखित शिकायत दी। उन्होंने फास्टैग से हुए लेनदेन से संबंधित साक्ष्य भी पुलिस को उपलब्ध कराए हैं। उनका कहना है कि उनकी कार उत्तराखंड से बाहर नहीं गई, इसके बावजूद तमिलनाडु में टोल कटना गंभीर सवाल खड़े करता है।
प्रोफेसर ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में एआरटीओ रामनगर में भी शिकायत की है। एआरटीओ की ओर से तमिलनाडु राज्य के सीएम पोर्टल पर विभागीय स्तर से शिकायत दर्ज कराने का आश्वासन दिया गया है।
डुप्लीकेट फास्टैग इस्तेमाल होने का शक
प्रोफेसर को आशंका है कि कोई व्यक्ति उनकी कार के फास्टैग की जानकारी का गलत इस्तेमाल कर तमिलनाडु में डुप्लीकेट फास्टैग के जरिए टोल भुगतान कर रहा है। उन्होंने इस संबंध में पहले ही भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और एयरटेल पेमेंट्स बैंक से शिकायत की थी, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हो सका है।
अब प्रोफेसर ने पुलिस से मामले की जांच कर फास्टैग के गलत इस्तेमाल का पता लगाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

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