रुद्रपुर। गृह मंत्रालय के समन्वय पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों की जांच में रुद्रपुर और ट्रांजिट कैंप क्षेत्र के दो बैंक खाते साइबर ठगी में ‘म्यूल अकाउंट’ के रूप में इस्तेमाल होते पाए गए। जांच में संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और विभिन्न राज्यों से साइबर ठगी की शिकायतें सामने आने पर पुलिस ने दोनों खाताधारकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आरोपितों की गिरफ्तारी की जाएगी।
गृह मंत्रालय के इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के समन्वय पोर्टल के माध्यम से साइबर सेल ऊधम सिंह नगर को दो संदिग्ध बैंक खातों की शिकायत मिली थी। जांच के दौरान संबंधित बैंकों से खातों के दस्तावेज और लेनदेन का विवरण प्राप्त किया गया।
संदिग्ध लेनदेन का खुलासा
पहले मामले में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की आवास विकास शाखा में ग्राम बिंदूखेड़ा निवासी गुरजंट सिंह के नाम से 1 अप्रैल 2026 को खोले गए खाते की जांच की गई। पुलिस के अनुसार, 4 अप्रैल से 18 जून 2026 के बीच इस खाते में यूपीआई के माध्यम से बड़ी संख्या में संदिग्ध लेनदेन हुए।
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर इस खाते के खिलाफ देहरादून, महाराष्ट्र, फरीदाबाद (हरियाणा) और अरुणाचल प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों से ऑनलाइन ठगी की चार से पांच शिकायतें दर्ज मिलीं। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने इस खाते को ‘म्यूल अकाउंट’ के रूप में संचालित किया जाना पाया।
दूसरे मामले में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एक खाते की जांच में ट्रांजिट कैंप क्षेत्र के पुराना खेड़ा वार्ड-5 निवासी सूरज गंगवार खाताधारक मिला। इस खाते के खिलाफ महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और गुजरात से साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की चार शिकायतें दर्ज थीं। जांच में सामने आया कि खाते से 1.98 लाख रुपये से अधिक की विवादित धनराशि विभिन्न माध्यमों से निकाली गई। पुलिस को आशंका है कि इस खाते का उपयोग भी साइबर अपराध से प्राप्त रकम को प्राप्त करने और आगे भेजने के लिए किया जा रहा था।
सीओ सिटी विभव सैनी ने बताया कि दोनों खाताधारकों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। विवेचना में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और आरोपितों की गिरफ्तारी भी की जाएगी।

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