उत्तराखंड में अब मनमानी जमीन खरीद पर रोक, बाहरी लोगों के लिए के लिए क्या हैं नियम, जानें पूरा कानून

खबर शेयर करें 👉

देहरादून। उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत, पर्यावरण और कृषि भूमि को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से प्रदेश में सख्त भू-कानून लागू किया गया है। सरकार ने राज्य में जमीन की अनियंत्रित खरीद-बिक्री पर रोक लगाने के साथ ही बाहरी राज्यों के लोगों के लिए भूमि खरीद के नियम कड़े किए हैं। नए प्रावधानों के तहत हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर को छोड़कर प्रदेश के अन्य 11 जिलों में बाहरी व्यक्ति कृषि और बागवानी के लिए जमीन नहीं खरीद सकेंगे।

आवासीय उपयोग के लिए नगर निकायों की सीमा से बाहर बाहरी व्यक्ति अधिकतम 250 वर्गमीटर भूमि खरीद सकता है। इसके लिए खरीदार को शपथ पत्र देना होगा। साथ ही उसके परिवार के अन्य सदस्य उत्तराखंड में इसी प्रावधान के तहत जमीन नहीं खरीद सकेंगे।

11 जिलों में खेती-बागवानी के लिए जमीन खरीद पर रोक

धामी सरकार ने वर्ष 2018 में लागू किए गए पूर्व भू-कानून को समाप्त कर नए और सख्त प्रावधान लागू किए हैं। इसके तहत हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर को छोड़कर अन्य 11 जिलों में बाहरी लोगों के लिए कृषि एवं बागवानी की जमीन खरीद पर रोक है।

यह भी पढ़ें 👉  नैनीताल में शराब की दुकानों पर प्रशाशन की ताबड़तोड़ छापेमारी, भवाली में ओवररेटिंग तो लालकुआं में पांच रुपये की ओवररेटिंग पकड़ी

हालांकि, नगर निकायों की सीमा के भीतर भूमि खरीद पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। नगर निकाय क्षेत्र से बाहर आवासीय उपयोग के लिए अधिकतम 250 वर्गमीटर भूमि खरीदने की अनुमति है। भूमि खरीदने वाले व्यक्ति को निर्धारित शपथ पत्र भी देना होगा।

पुराने कानून में 12.5 एकड़ तक जमीन खरीद का प्रावधान

वर्ष 2018 में तत्कालीन त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने भू-कानून में बदलाव किया था। इसमें उद्योग, शिक्षण संस्थान, कृषि और बागवानी सहित विभिन्न प्रयोजनों के लिए पर्वतीय क्षेत्रों में 12.5 एकड़ तक भूमि खरीद का प्रावधान किया गया था। बाद में भूमि खरीद के बढ़ते मामलों को लेकर भू-कानून को और सख्त करने की मांग उठती रही।

यह भी पढ़ें 👉  उधमसिंहनगर में बेटी से छेड़छाड़ का विरोध करना पड़ा भारी, पिता की पीट-पीटकर हत्या

भू-कानून में प्रमुख प्रावधान

  • कानून का उल्लंघन होने पर संबंधित जमीन सरकार में निहित हो सकती है।
  • भूमि खरीदने वाले व्यक्ति को रजिस्ट्रार के समक्ष शपथ पत्र देना होगा।
  • 12.5 एकड़ तक भूमि खरीद की पुरानी सीमा का प्रावधान समाप्त किया गया है।
  • भूमि खरीद के लिए अनुमति की प्रक्रिया शासन स्तर से निर्धारित की गई है।
  • पोर्टल के माध्यम से भूमि खरीद की प्रक्रिया पर सरकार निगरानी रखेगी।
  • उद्योग, होटल, चिकित्सा संस्थान समेत विभिन्न व्यावसायिक प्रयोजनों के लिए भूमि खरीद में संबंधित विभागों से भूमि अनिवार्यता प्रमाणपत्र लेना होगा।

कब क्या हुआ?

2002: उत्तराखंड की पहली एनडी तिवारी सरकार ने भू-कानून को सख्त करने की दिशा में कदम उठाए।

2003: बाहरी व्यक्तियों के लिए आवासीय उपयोग के लिए 500 वर्गमीटर तक भूमि खरीद की सीमा तय की गई। कृषि भूमि खरीद के लिए 12.5 एकड़ तक की अनुमति डीएम स्तर से दी जाती थी।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड के स्कूलों में कल से बदलेगा समय, 1 अक्टूबर से शीतकालीन समय-सारिणी लागू

2007: बाहरी व्यक्तियों के लिए आवासीय भूमि खरीद की सीमा 500 वर्गमीटर से घटाकर 250 वर्गमीटर कर दी गई।

2018: व्यावसायिक और औद्योगिक प्रयोजनों के लिए भूमि खरीद की सीमा में बदलाव करते हुए 12.5 एकड़ के दायरे को बढ़ाकर 30 एकड़ किया गया।

2021: भू-कानून की समीक्षा के लिए पूर्व मुख्य सचिव सुभाष कुमार की अध्यक्षता में समिति गठित की गई।

2022: सुभाष कुमार समिति ने सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी।

2025: धामी सरकार ने राज्य में सख्त भू-कानून लागू किया, जिसके बाद बाहरी लोगों के लिए जमीन खरीद के नियम और कड़े किए गए।

ADVERTISEMENTS Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad