नैनीताल वन प्रभाग के मनोरा और भवाली रेंज में तीन महिलाओं को निवाला बनाने वाले वन्यजीवों की पहचान डीएनए जांच से हो गई है। जांच में सामने आया है कि इन घटनाओं में एक नहीं, बल्कि दो अलग-अलग वन्यजीव शामिल थे।
जून स्टेट और ज्योली क्षेत्र में हुए हमलों के लिए एक नर बाघ जिम्मेदार था, जबकि सूर्या गांव क्षेत्र में महिला पर हमला करने वाली बाघिन थी।
हालांकि, धारी, खन्स्यू और तल्ली दीनी क्षेत्र में तीन महिलाओं की मौत के मामलों में अब भी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि हमलावर बाघ था या गुलदार।
बीते शीतकाल में नैनीताल वन प्रभाग में मानव-वन्यजीव संघर्ष के कई गंभीर मामले सामने आए। पांच माह के भीतर अलग-अलग क्षेत्रों में छह महिलाओं की वन्यजीव हमलों में मौत हो गई थी।
इन घटनाओं के बाद वन विभाग ने छह गुलदारों को पिंजरों में कैद किया, जबकि एक बाघ और एक बाघिन को ट्रैंकुलाइज कर रेस्क्यू किया था।
पकड़े गए सभी वन्यजीवों के साथ ही मृत महिलाओं से लिए गए बाल और लार के नमूनों को डीएनए जांच के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान भेजा गया था।
वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) आकाश गंगवार ने बताया कि सभी मामलों की जांच रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है। इनमें तीन मामलों में डीएनए नमूने हमलावर वन्यजीवों से मेल खा गए हैं।
दो महिलाओं को बाघ, एक को बाघिन ने बनाया था शिकार
भवाली रेंज के भीमताल स्थित जून स्टेट में तीन फरवरी को गंगा देवी की वन्यजीव हमले में मौत हो गई थी। इसके बाद तीन अप्रैल को सूर्या गांव में हंसा देवी और 22 अप्रैल को ज्योली में हेमा देवी की भी जान चली गई थी।
इन घटनाओं के बाद वन विभाग ने एक बाघिन और 28 अप्रैल को ज्योली क्षेत्र से एक नर बाघ को ट्रैंकुलाइज कर रेस्क्यू किया था। डीएनए जांच में पुष्टि हुई कि जून स्टेट और ज्योली की घटनाओं के लिए नर बाघ जिम्मेदार था, जबकि सूर्या गांव की घटना बाघिन द्वारा की गई थी।
तीन मामलों में अब भी बरकरार है रहस्य
26 दिसंबर को तल्ली दीनी की हेमा देवी, 30 दिसंबर को खन्स्यू (चमोली) की रेखा देवी और 11 जनवरी को धारी के कुटियाखाल की गंगा देवी की मौत के मामलों में अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि हमलावर बाघ था या गुलदार।
इन घटनाओं के बाद पकड़े गए छह गुलदारों से डीएनए नमूनों का मिलान नहीं हो पाया, जिससे इन मामलों में हमलावर वन्यजीव की पहचान अब भी रहस्य बनी हुई है।
बाघिन देहरादून जू भेजी गई, बाघ रहेगा रेस्क्यू सेंटर में
डीएनए जांच में पुष्टि होने के बाद रानीबाग रेस्क्यू सेंटर में रखी गई बाघिन को उच्चाधिकारियों के निर्देश पर देहरादून जू भेज दिया गया है। फिलहाल उसे वहां क्वारंटाइन में रखा जाएगा।
वहीं, करीब सात से आठ वर्ष आयु का नर बाघ फिलहाल रानीबाग रेस्क्यू सेंटर में ही रहेगा। डीएफओ आकाश गंगवार ने बताया कि बाघ पूरी तरह स्वस्थ है और फिलहाल उसे वहीं रखा गया है।

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