नैनीताल में हिमालयी चित्रों से सजा इतिहास, छात्रों ने 170 के दशक को करीब से जाना

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नैनीताल में पहाड़ फाउंडेशन के तत्वावधान में सीआरएसटी इंटर कॉलेज में आयोजित छह दिवसीय हिमालयी पेंटिंग प्रदर्शनी बुधवार को भी उत्साह के साथ जारी रही। प्रदर्शनी के दूसरे दिन भारतीय शहीद सैनिक विद्यालय और सीआरएसटी सहि शहर के अन्य स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग कर 1850 के दशक के हिमालय को तस्वीरों के माध्यम से समझा। यह प्रदर्शनी आगामी दिनों में भी दर्शकों और शोधार्थियों के लिए जारी रहेगी। प्रदर्शनी के दौरान आयोजित विशेष सत्र में वक्ताओं ने कहा।

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जर्मन भूवैज्ञानिक श्लागिंटवेट भाइयों (एडोल्फ, हरमन और रॉबर्ट) ने न केवल 1854-1858 के बीच दक्षिण भारत से लद्दाख और असम से भूटान तक की साहसिक यात्राएं कीं, बल्कि वे पहले यूरोपीय थे जिन्होंने अपने रिकॉर्ड में नैन सिंह जैसे भारतीय सहायकों के नाम दर्ज किए। प्रो. पाठक ने बताया कि इस प्रदर्शनी में प्रदर्शित 77 चित्रों में से पांच चित्र पहली बार सार्वजनिक किए गए हैं, जिनमें मेघालय का बोगापानी पुल और श्रीनगर की डल झील शामिल है।

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वहीं, जर्मन लेखिका सबीना फेल्मी ने पाकिस्तान के हुंज़ा क्षेत्र के वाखी समुदाय के साथ बिताए अपने अनुभवों को साझा करते हुए वहां की मौखिक परंपराओं और वास्तुकला पर चर्चा की। इस मौके पर प्रधानाचार्य मनोज पांडे, अनूप साह, राजीव लोचन साह, चंदन डांगी, प्रो. रीतेश साह आदि मौजूद रहे। यह प्रदर्शनी आगामी दिनों में भी दर्शकों और शोधार्थियों के लिए जारी रहेगी।

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