उत्तराखण्ड में नीली आंखों वाले व्हाइट टाइगर तेजस को भाया चिड़ियाघर, बेहद शांत रहकर शुरू की चहलकदमी

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व्हाइट टाइगर तेजस को करीब 20 दिनों तक क्वारंटीन और निगरानी में रखा जाएगा, उसके बाद ही वो पर्यटकों के सामने आएगा.

देहरादून: मध्य प्रदेश से देहरादून चिड़ियाघर में आए नए मेहमान ने अपने नए घर को आते ही स्वीकार कर लिया. ग्वालियर से करीब 550 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद तेजस न तो परेशान दिख और ना ही उसमें एक बार भी चिड़ियाघर में पहुंचकर गुस्से का इजहार किया. बेहद शांत स्वभाव के साथ उसने चहलकदमी करते हुए बाड़े में अपनी जगह ले ली.

उम्मीद है कि देहरादून चिड़ियाघर में तेजस का आना पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए तो उत्साह का कारण बनेगा. फिलहाल सबसे ज्यादा उत्साहित चिड़ियाघर के अधिकारी और कर्मचारी दिखाई दे रहे हैं. इसकी वजह भी खास है. चिड़ियाघर के अधिकतर कर्मचारियों ने पहली बार किसी व्हाइट टाइगर को करीब से देखा है.

पहली बार देहरादून जू में आया व्हाइट टाइगर: चिड़ियाघर की रेंजर दीक्षा भट्ट भी मानती हैं कि उन्होंने पहली बार व्हाइट टाइगर देखा है और उसे देखने का अनुभव उनके लिए अलग रोमांच वाला रहा. फिलहाल यह रोमांच केवल देखने तक ही सीमित रहेगा. अगले करीब एक महीने तक न तो चिड़ियाघर आने वाले पर्यटक तेजस का दीदार कर सकेंगे और न ही चिड़ियाघर के अधिकांश कर्मचारी उसके पास जा सकेंगे.

20 दिनों तक क्वारंटीन रहेगा तेजस: दरअसल, एक चिड़ियाघर से दूसरे चिड़ियाघर में वन्यजीवों के ट्रांसलोकेशन के बाद उसे कुछ समय के लिए अलग रखने का प्रोटोकॉल लागू होता है. इसी के तहत तेजस को भी करीब 20 दिनों तक क्वारंटीन और निगरानी में रखा जाएगा. इस दौरान बाड़ा कीपर और पशु चिकित्सक के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को उसके पास जाने की अनुमति नहीं होगी.

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550 किलोमीटर का सफर, 40 की रफ्तार से भी कम चली गाड़ी: तेजस ग्वालियर से देहरादून करीब 550 किलोमीटर का सफर तय कर पहुंचा है. ट्रांसलोकेशन के दौरान तय प्रोटोकॉल और पशु की सुरक्षा को देखते हुए उसे लेकर चलने वाली गाड़ियों की रफ्तार भी नियंत्रित रखी गई. टीम ने कई घंटों का सफर तय करने के बाद तेजस को देहरादून पहुंचाया. करीब 14 घंटे से ज्यादा के इस सफर में उसकी सेहत और व्यवहार पर लगातार नजर रखी गई.

ग्वालियर से तेजस का डाइट चार्ट और हेल्थ रिपोर्ट भी आई: ग्वालियर से आई टीम अपने साथ केवल तेजस को लेकर नहीं पहुंची, बल्कि उसका डाइट चार्ट और हेल्थ रिपोर्ट भी साथ लाई है. अब देहरादून चिड़ियाघर में उसके भोजन और स्वास्थ्य की निगरानी इसी जानकारी के आधार पर की जाएगी, ताकि नए वातावरण में उसके खान-पान और दिनचर्या में अचानक बदलाव न हो.

नीली आंखें और सफेद रंग बनाते हैं खास: महज ढाई साल का तेजस अपनी उम्र के लिहाज से भी काफी सक्रिय है. उसका सफेद रंग, शरीर पर काली धारियां और नीली आंखें उसे सामान्य बाघों से अलग रूप देते हैं. कम उम्र के चलते उसके व्यवहार में भी चंचलता दिखाई दे रही है. वह दिनभर खेलता है, बाड़े के सहारे दो पैरों पर खड़ा होता है और अटखेलियां करता नजर आता है.

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व्हाइट टाइगर की सबसे खास पहचान उसका सफेद फर और उस पर दिखाई देने वाली गहरी धारियां हैं. नीली आंखें भी इसकी खास पहचान मानी जाती हैं. हालांकि यह समझना जरूरी है कि व्हाइट टाइगर कोई अलग प्रजाति या अलग नस्ल का बाघ नहीं है. यह मूल रूप से बाघ ही है, जिसमें एक आनुवंशिक बदलाव के कारण शरीर के फर का सामान्य नारंगी रंग सफेद दिखाई देता है. वैज्ञानिक स्रोत इसे रंग से जुड़ी एक आनुवंशिक विशेषता बताते हैं.

पीले बाघ से क्या है अंतरछ सामान्य तौर पर जिसे लोग येलो टाइगर कहते हैं, उसके शरीर पर नारंगी या पीला-भूरा फर और काली धारियां होती हैं. यही बाघ का सामान्य रंग-रूप है. इसके मुकाबले व्हाइट टाइगर में फर का आधार रंग सफेद होता है, लेकिन काली धारियां बनी रहती हैं. यानी दोनों के शरीर पर धारियों का पैटर्न अलग पहचान देता है, लेकिन सफेद बाघ की खासियत उसके रंग की आनुवंशिक भिन्नता है. बाघों की धारियां भी बेहद महत्वपूर्ण पहचान होती हैं. जैसे इंसानों के फिंगरप्रिंट अलग होते हैं, वैसे ही प्रत्येक बाघ की धारियों का पैटर्न अलग होता है. वैज्ञानिक और वन्यजीव विशेषज्ञ इन्हीं धारियों के आधार पर अलग-अलग बाघों की पहचान कर सकते हैं.

व्हाइट टाइगर को लेकर धारणा: व्हाइट टाइगर को लेकर एक आम धारणा यह भी है कि वह एल्बिनो यानी पूर्ण अल्बिनो बाघ होता है, लेकिन ऐसा नहीं है. व्हाइट टाइगर में सफेद रंग आनुवंशिक कारणों से आता है, जबकि उसकी काली धारियां बनी रहती हैं. यही वजह है कि सफेद शरीर के बावजूद वह पूरी तरह बिना रंग वाला जानवर नहीं दिखाई देता. रंग बदलने के बावजूद व्हाइट टाइगर के मूल व्यवहार और बाघ की प्राकृतिक खूबियां वही रहती हैं.

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बाघ शक्तिशाली शिकारी, बेहद फुर्तीले और मजबूत शरीर वाले जानवर हैं. वे सामान्यतः अकेले रहना पसंद करते हैं और शिकार के लिए अपनी ताकत के साथ-साथ छिपकर हमला करने की रणनीति का इस्तेमाल करते हैं.

तेजस की कम उम्र में दिखाई दे रही चंचलता: तेजस अभी पूरी तरह वयस्क नहीं हुआ है. यही वजह है कि फिलहाल उसके व्यवहार में खेलना, बाड़े के आसपास घूमना और अटखेलियां करना ज्यादा नजर आ रहा है. आने वाले समय में उसके व्यवहार और दिनचर्या को चिड़ियाघर की टीम लगातार रिकॉर्ड करेगी.

पहले मौजूदा टाइगर, फिर तेजस का दीदार: फिलहाल तेजस के लिए रॉयल बंगाल टाइगर के बगल में ही अलग बाड़ा तैयार किया गया है. क्वारंटीन और निगरानी की अवधि पूरी होने के बाद जब उसे डिस्प्ले में लाया जाएगा तो पर्यटकों को एक ही जगह सामान्य रंग वाले रॉयल बंगाल टाइगर और उसके ठीक पास व्हाइट टाइगर देखने का मौका मिलेगा. यानी चिड़ियाघर पहुंचने वाले पर्यटकों के लिए आने वाले दिनों में एक ही जगह बाघ के दो अलग रंग-रूप देखने का अनुभव होगा. एक तरफ नारंगी-पीले रंग और काली धारियों वाला सामान्य रॉयल बंगाल टाइगर होगा, तो दूसरी तरफ सफेद फर और काली धारियों के साथ नीली आंखों वाला तेजस। यही अंतर उसे देहरादून चिड़ियाघर का नया आकर्षण बनाने वाला है.

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