ऊधमसिंह नगर जिले। में साइबर अपराध की काली कमाई छिपाने के लिए म्यूल खातों के प्रयोग का बड़ा खुलासा हुआ है। साइबर थाना कुमाऊं परिक्षेत्र के दो दरोगाओं की तहरीर पर तीन अभियुक्तों पर प्राथमिकी दर्ज की गई है।
एसटीएफ की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर अपराध से अर्जित धनराशि को छिपाने, विभिन्न खातों में ट्रांसफर करने आदि के लिए किया जा रहा था। एसटीएफ कुमाऊं यूनिट के दरोगा विपिन चंद्र जोशी ने बताया कि प्रारंभिक जांच और एनसीआरपी पोर्टल पर उपलब्ध शिकायतों की जांच से यह तथ्य सामने आया है कि नैनीताल बैंक, बेरिया दौलत, बाजपुर के खाताधारक महेश निवासी बाजपुर के बैंक खाते में देश के विभिन्न राज्यों में हुए साइबर अपराधों से संबंधित लगभग पांच लाख रुपये की धोखाधड़ी की धनराशि प्राप्त हुई थी।
उन्होंने बताया कि यह खाता दो लेयर में था और पोर्टल पर इसमें तीन शिकायतें दर्ज थीं। बैंक स्टेटमेंट, ट्रांजेक्शन पैटर्न और मनी ट्रेल एनालिसिस से पता चला कि खाते में आई धनराशि को तत्काल अन्य बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया गया और चेक, पीओएस मशीन, यूपीआई आदि के माध्यम से निकालकर आगे वितरित किया गया।
पूछताछ में महेश ने बताया कि गदरपुर निवासी हरजीत सिंह देश के विभिन्न राज्यों से रकम मंगवाकर उससे चेक के माध्यम से निकलवा लेता था। महेश के अनुसार, हरजीत ने उसके खाते में करीब 10 लाख रुपये मंगवाए थे और गांव के अन्य लोगों के खातों से भी करीब एक करोड़ रुपये की धनराशि निकलवाई थी। एसटीएफ ने दोनों पर प्राथमिकी दर्ज की है।
दरोगा जगदीप सिंह नेगी ने बताया कि एचडीएफसी बैंक के खाताधारक सचिन कुशवाहा से उसके दोस्त उज्ज्वल दानू निवासी ग्राम दमगड़ा नगला तराई थाना झनकईया ने खाता संख्या मांगा था। इस खाते में एनसीआरपी पोर्टल पर तीन शिकायतें दर्ज हैं जिनमें 1.4 करोड़ रुपये, 30.80 लाख रुपये और 4.61 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की धनराशि प्राप्त हुई थी।
खाते की जांच में पता चला कि धनराशि को तुरंत अन्य खातों में स्थानांतरित कर दिया गया और एटीएम, पीओएस मशीन, यूपीआई आदि से निकालकर वितरित किया गया। प्रारंभिक जांच में यह भी पाया गया कि अभियुक्त फर्जी केवाईसी दस्तावेज, फर्जी फर्मों, विभिन्न मोबाइल नंबरों, ई-मेल आईडी और इंटरनेट बैंकिंग क्रेडेंशियल्स का उपयोग कर बैंक खाते संचालित कर रहे थे। इस मामले में एसटीएफ ने उज्ज्वल दानू के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
हैं ‘म्यूल खाते’
म्यूल खाते वह बैंक खाते होते हैं जिन्हें अपराधी खुद संचालित नहीं करते बल्कि उन्हें भोले-भाले लोगों के नाम पर खुलवाया जाता है या फिर उनसे उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड, चेकबुक, सिम कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी लेकर उनका दुरुपयोग किया जाता है। इन खातों का मुख्य उद्देश्य साइबर अपराधों से प्राप्त अवैध धन को वास्तविक अपराधियों तक पहुंचाने से पहले उसे कई परतों में बांटना और उसकी उत्पत्ति को छिपाना होता है।
दोनों मामलों में, खाताधारकों के आर्थिक लाभ या कमीशन के बदले अपनी बैंक खातों की सुविधाओं को एक संगठित साइबर अपराध सिंडिकेट को उपलब्ध कराने की बात सामने आई है। प्रकरण में तीन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कुछ अभियुक्त को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। – नीलेश आनंद भरणे, आईजी एसटीएफ

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