हाई कोर्ट शिफ्टिंग के खिलाफ अधिवक्ताओं की कानूनी लड़ाई जारी, सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर

खबर शेयर करें 👉

नैनीताल। नैनीताल से हाई कोर्ट को हल्द्वानी शिफ्ट किए जाने के विरोध में अधिवक्ताओं ने अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया है। अधिवक्ताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की गई है। इसके साथ ही हाई कोर्ट शिफ्टिंग के प्रस्ताव के विरोध में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केंद्रीय कानून मंत्री को ज्ञापन भेजने की तैयारी है।

बुधवार को हाई कोर्ट परिसर के समीप एक होटल में आयोजित पत्रकार वार्ता में बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एमसी पंत ने कहा कि 12 अगस्त 2026 को राज्य सरकार ने बेलबाबा, हल्द्वानी स्थित वन भूमि को हाई कोर्ट के लिए हस्तांतरित करने की स्वीकृति प्रदान की है।

उन्होंने कहा कि वन संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार राज्य सरकार केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की अनुमति के बिना इस संबंध में निर्णय नहीं ले सकती। उन्होंने यह भी दावा किया कि राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में कहा था कि बेलबाबा के आसपास हाथी कॉरिडोर नहीं है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कई निर्देश जारी करते हुए नए सिरे से हाथी कॉरिडोर चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं।

यह भी पढ़ें 👉  चित्रशिला घाट में हादसा टला: नदी के तेज बहाव में बहा युवक, पुलिस ने सकुशल बचाया (देखे वीडियो)

अधिवक्ता डॉ. कार्तिकेय हरि गुप्ता ने कहा कि नैनीताल के जिलाधिकारी की ओर से बेलबाबा, हल्द्वानी की वन भूमि को हाई कोर्ट के लिए हस्तांतरित करने के संबंध में मई 2026 में राज्य सरकार को भेजा गया प्रस्ताव कानूनी प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने बताया कि इस मामले में अधिवक्ता कौशल साह जगाती ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को प्रत्यावेदन भेजा था। मंत्रालय ने तीन सितंबर को उत्तराखंड सरकार के प्रमुख सचिव, वन एवं पर्यावरण को पत्र भेजकर कानून के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई करने को कहा है।

यह भी पढ़ें 👉  हल्द्वानी के कुसुमखेड़ा में रोडवेज बस हादसे का शिकार, यात्रियों में मची चीख-पुकार (देखे वायरल वीडियो)

अधिवक्ता रमन शाह ने कहा कि हाई कोर्ट से खारिज हुई उनकी याचिका का मामला अब न्यायिक प्रक्रिया में है और सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता खुल गया है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के 15 जुलाई के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका विचाराधीन है। अब हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ भी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया जाएगा।

वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व सांसद डॉ. महेंद्र पाल ने आरोप लगाया कि नैनीताल से हाई कोर्ट शिफ्ट होने के बाद हाई कोर्ट की वर्तमान इमारत और परिसर का ‘मॉनेटाइजेशन’ किया जाएगा। उनका कहना था कि सरकार इसे निजी हाथों में देने की तैयारी कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे सरकार के ‘व्यापारी के रूप में काम करने’ की मंशा स्पष्ट होती है।

यह भी पढ़ें 👉  (बड़ी खबर) कैंची धाम के बढ़ते दबाव के बीच बदलेगा रोपवे का रूट, काठगोदाम-ज्यौलीकोट से सीधे मंदिर तक पहुंचेगी सुविधा

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हाई कोर्ट के नाम पर हल्द्वानी में भूमि संबंधी गतिविधियों से प्रॉपर्टी डीलरों को लाभ पहुंचाया जा रहा है।

पत्रकार वार्ता में बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष दुर्गा सिंह मेहता, नवनीश नेगी, भुवनेश जोशी, कमलेश तिवारी, कैलाश तिवारी समेत अन्य अधिवक्ताओं ने नैनीताल से हाई कोर्ट शिफ्टिंग का विरोध किया। उन्होंने इसे उत्तराखंड राज्य की मूल अवधारणा के विपरीत बताया और आंदोलन के साथ कानूनी लड़ाई जारी रखने की बात कही।

ADVERTISEMENTS Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad