रुद्रपुर। मतभेद और मनभेद के अर्थ भले अलग हों, लेकिन जब सियासत में दोनों गहरे हो जाएं तो रिश्तों में अदावत की स्थिति बन जाती है। राजनीति में मतभेद होना कोई नई बात नहीं, मगर लंबे समय तक बना मनभेद रिश्तों में खटास बढ़ाता रहता है। किच्छा में मंगलवार को विधायक तिलकराज बेहड़ को भीड़ के बीच एक समर्थक द्वारा थप्पड़ मारे जाने की घटना ने करीब 15 साल पुराने सियासी विवाद की यादें ताजा कर दीं।
किच्छा की राजनीति में विधायक तिलकराज बेहड़ और पूर्व विधायक राजेश शुक्ला के बीच लंबे समय से राजनीतिक तनातनी चर्चा में रही है। मंगलवार को निकाय चुनाव के मतदान के दौरान हुए विवाद ने एक बार फिर दोनों खेमों को आमने-सामने ला दिया।
बताया जाता है कि 2011 में रुद्रपुर के भदईपुरा स्थित रामलीला मैदान के विवाद को लेकर दोनों नेताओं के बीच टकराव हुआ था। उस दौरान बेहड़ पर राजेश शुक्ला को थप्पड़ मारने का आरोप लगा था। उस घटना के बाद भी दोनों पक्षों के बीच कहासुनी और राजनीतिक बयानबाजी चर्चा में रही थी।
वक्त बीतने के बावजूद 2011 का वह विवाद किच्छा की सियासत में अक्सर याद किया जाता रहा है। मंगलवार की घटना ने एक बार फिर उसी पुराने घटनाक्रम को चर्चा में ला दिया। हालांकि इस बार थप्पड़ विधायक तिलकराज बेहड़ को पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने नहीं, बल्कि उनके समर्थक बताए जा रहे व्यक्ति ने मारा।
नगर पालिका परिषद किच्छा और सिरौलीकलां के लिए हुए मतदान के दौरान दिनभर स्थिति सामान्य रही। शाम को अचानक दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया। इसी दौरान पुलिस की मौजूदगी में एक व्यक्ति ने विधायक तिलकराज बेहड़ की ओर हाथ उठाकर उन्हें थप्पड़ मार दिया।
घटना के दौरान मौके पर मौजूद लोगों ने वीडियो बना लिया, जो बाद में इंटरनेट मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने लगा। इसके बाद किच्छा का यह मामला स्थानीय राजनीति से निकलकर पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया।
ताजा घटना के बाद एक बार फिर बेहड़ और शुक्ला के बीच पुराने सियासी टकराव की चर्चा शुरू हो गई है। मंगलवार की घटना ने यह भी दिखा दिया कि किच्छा की राजनीति में वर्षों पुराने विवाद आज भी किस तरह चर्चा में लौट आते हैं।
- 2011 में तिलकराज बेहड़ ने राजेश शुक्ला को जड़ा था तमाचा
- अब शुक्ला समर्थक के थप्पड़ से सियासी गलियारे में गूंजी आवाज
फ़ोटो परिचय :- AI द्वारा बनाई गई है

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