देहरादून। गुलाबी गुब्बारों से सजी कार सड़क पर आगे बढ़ रही थी, पीछे बड़े अक्षरों में लिखा था कि ‘बेटी हुई है’। कार जैसे-जैसे आगे बढ़ी, राह चलते लोग ठहरकर उसे देखने लगे। किसी ने मोबाइल निकाला, किसी ने मुस्कुराकर परिवार को बधाई दी।
दून में बेटी के जन्म का यह अलग अंदाज इन दिनों इंटरनेट मीडिया पर खास चर्चा में है। यह दृश्य केवल एक परिवार की खुशी नहीं, बल्कि समाज में बदलती सोच का प्रभावी संदेश भी बन गया है।
माउंट व्यू कालोनी सहस्रधारा रोड निवासी करन अरोड़ा और दीक्षा अरोड़ा के घर चार अप्रैल को चकराता रोड स्थित लूथरा मैटरनिटी एंड इनफर्टिलिटी सेंटर में बेटी का जन्म हुआ।
एक अप्रैल को भर्ती होने के बाद परिवार को जब नन्ही बिटिया के जन्म की सूचना मिली तो घर से ही दो वाहनों को गुलाबी गुब्बारों से सजाकर अस्पताल पहुंचा गया।
अस्पताल परिसर में भी परिवार और चिकित्सकों ने बच्ची का स्वागत किया। इसके बाद नवजात को विशेष अंदाज में घर लाया गया।
परिवार के बड़े सदस्य व करन के बड़े भाई अर्जुन अरोड़ा ने बताया कि घर में बहन नहीं होने के कारण लंबे समय से परिवार में बेटी के आगमन की इच्छा थी।
जैसे ही छोटे भाई करन और दीक्षा ने बेटी के जन्म की सूचना दी, परिवार ने इसे लक्ष्मी का आगमन मानकर उत्सव की तरह मनाने का निर्णय लिया।
बदलती सोच की नई तस्वीर
कुछ वर्ष पहले तक बेटियों के जन्म पर परिवारों में उत्साह कम दिखाई देता था, लेकिन अब शहर में ऐसे दृश्य सामाजिक बदलाव का संकेत दे रहे हैं।
बेटी के जन्म को सार्वजनिक उत्सव की तरह मनाना यह दर्शाता है कि नई पीढ़ी बेटियों को सम्मान, गर्व और खुशहाली के प्रतीक के रूप में स्वीकार कर रही है। यही सोच समाज में सकारात्मक बदलाव की सबसे मजबूत आधारशिला बन रही है।
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