(उत्तराखण्ड) मानवता की मिसाल: दो जिलाधिकारियों की पहल से बची मासूम की जिंदगी

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उत्तरकाशी। उत्तरकाशी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चिन्यालीसौड में प्रसव के बाद एक नवजात में पीलिया के लक्षण दिखाई दिए तो स्वजन उसे पहले जिला अस्पताल और बाद में हायर सेंटर देहरादून ले गए, जहां उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

लेकिन अस्पताल ने आयुष्मान कार्ड लगाने से मना कर स्वजनों से 25 हजार रुपए जमा कराने को कहा। आर्थिक रूप कमजोर परिवार के पास इतने पैसे नहीं थे कि मासूम का उपचार हो सके।
इस मामले का पता चलने पर उत्तरकाशी के डीएम प्रशांत आर्य व देहरादून के डीएम सविन बंसल ने मानवता का फर्ज निभाते हुए मासूम के उपचार के लिए त्वरित सहायता उपलब्ध करवाई, जिससे उसकी जान बच सकी।

मुख्य चिकित्साधिकारी डा.बीएस रावत ने बताया कि बीते 22-23 मार्च को जनपद के एक सूदरवर्ती गांव के आशीष की पत्नी पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चिन्यालीसौड़ पहुंचे थे, जहां नवजात शिशु का जन्म हुआ।
लेकिन यह स्वजन निर्धारित अगले दो दिनों तक अस्पताल में जच्चा-बच्चा की निगरानी के लिए रहने की बजाए उन्हें लेकर अपने घर चले गया था।
घर पर नवजात को एक-दो दिन रखने के बाद उसका स्वास्थ्य बिगड़ा, जिस पर स्वजन मासूम को लेकर पहले जिला अस्पताल आए और फिर हायर सेंटर देहरादून चले गए। लेकिन वह यहां से डिस्चार्ज सहित अन्य जरुरी कागजात नहीं लेकर गए।

बताया कि इस मामले का पता चलते ही डीएम प्रशांत आर्य के निर्देश पर तत्काल उक्त नवजात के उपचार में मदद के लिए हायर सेंटर रेफर आदि के लिए जरुरी दस्तावेज तैयार कर भिजवाए गए।
वहीं, उत्तरकाशी व देहरादून के जिलाधिकारियों ने संबंधित निजी अस्पताल को नियम व प्रक्रियाओं का हवाला देकर इलाज नहीं रोकने के सख्त निर्देश दिए, जिस पर अस्पताल ने मासूम का इलाज शुरू किया।
बताया कि संबंधित परिवार ने त्वरित मदद के लिए जिला प्रशासन का आभार जताया है।