रामनगर। रामनगर के फॉरेस्ट कैंपस से एक दुर्लभ कॉमन सैंड बोआ (Common Sand Boa) का सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है। आम बोलचाल में इसे ‘दो मुंहा साँप’ कहा जाता है, लेकिन वास्तव में इसके दो मुंह नहीं होते। इसकी पूँछ का आकार सिर जैसा दिखाई देता है, जिससे शिकारी अक्सर भ्रमित हो जाते हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, खतरा महसूस होने पर यह अपनी पूँछ को सिर की तरह प्रस्तुत कर दुश्मन को भ्रमित करता है और सुरक्षित निकलने का प्रयास करता है। यह पूरी तरह गैर विषैला साँप है और इंसानों के लिए किसी प्रकार का खतरा नहीं बनता।
इसके बावजूद अंधविश्वास, तंत्र-मंत्र और कथित यौन शक्ति बढ़ाने वाली दवाओं से जुड़े झूठे दावों के कारण वर्षों तक इस प्रजाति की बड़े पैमाने पर तस्करी होती रही। अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में इसकी कीमत करोड़ों रुपये होने के दावे समय-समय पर किए जाते रहे हैं, हालांकि इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
लगातार शिकार और अवैध तस्करी के कारण यह प्रजाति अब काफी दुर्लभ हो चुकी है। ऐसे में रामनगर क्षेत्र में कई वर्षों बाद कॉमन सैंड बोआ का मिलना वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। रेस्क्यू के बाद वन विभाग की टीम ने आवश्यक जांच के उपरांत उसे सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

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