उत्तराखण्ड के इस गाँव मे दिखावे की शादियों पर लगाम कसने को एकजुट हुए ग्रामीण : महिलाओं के गहनों से लेकर दावत तक के नियम तय, नियम तोड़ने पर 50 हजार जुर्माना

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चकराता। शादी-विवाह में बढ़ते दिखावे और अनावश्यक खर्चों पर रोक लगाने के लिए चकराता विकासखंड के कुराड़ और सिचाड़ गांवों के ग्रामीणों ने सामूहिक पहल की है। दोनों गांवों के ग्रामीणों की बैठक में विवाह समारोहों और सामाजिक रीति-रिवाजों को सरल बनाने के लिए कई अहम निर्णय लिए गए। सर्वसम्मति से तय किया गया कि निर्धारित नियमों का उल्लंघन करने वाले परिवार पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही, दोनों गांवों में सामाजिक बहिष्कार का भी निर्णय लिया गया।

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स्याणा मातबर सिंह कुराड़ और स्याणा राजेंद्र सिंह सिचाड़ के नेतृत्व में आयोजित बैठक में विवाह समारोहों में सादगी बनाए रखने पर जोर दिया गया। बैठक में तय किया गया कि शादी-विवाह में महिलाएं केवल मंगलसूत्र, नाक में फुल्ली और कानों में झुमके पहनकर शामिल होंगी। इसके अलावा विवाह समारोहों में अंग्रेजी शराब और फास्ट फूड पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया। ग्रामीणों का मानना है कि इन नियमों से सामाजिक परंपराओं को बढ़ावा मिलेगा और विवाह समारोहों में होने वाली अनावश्यक प्रतिस्पर्धा पर रोक लगेगी।

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भांजे की शादी में एक बकरा, बेटी के विवाह में पांच बर्तनों की परंपरा

बैठक में रिश्तेदारी से जुड़ी परंपराओं को लेकर भी नियम निर्धारित किए गए। तय किया गया कि भांजे की शादी में मामा पक्ष की ओर से केवल एक बकरा दिया जाएगा। वहीं, बेटी की शादी में पांच बर्तन यानी पंच बन्डियाई की परंपरा निर्धारित नियमों के अनुसार निभाई जाएगी। महिलाओं को चांदी के सिक्के देने की परंपरा को लेकर भी निर्णय लिए गए।

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ग्रामीणों के अनुसार, शादी-विवाह में बढ़ते खर्च के कारण कई परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। ऐसे में दोनों गांवों की यह पहल विवाह समारोहों में सादगी को बढ़ावा देने और अनावश्यक खर्चों को सीमित करने के उद्देश्य से की गई है। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि इन सामूहिक निर्णयों से समाज में सादगीपूर्ण विवाह की परंपरा को प्रोत्साहन मिलेगा और परिवारों को आर्थिक राहत मिलेगी।

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