हल्द्वानी । मां अपने बच्चे को जन्म देने के साथ ही उसकी जिंदगी बचाने व बनाने के लिए अपनी जिंदगी दांव पर लगा देती है। अपने बच्चे की जान बचाने के लिए मां निस्वार्थ अपनी जान की परवाह तक नहीं करती है। ऐसी ही एक कहानी नैनीताल जिले के बेतालघाट की आनंदी देवी की है, जिन्होंने अपने पुत्र की किडनी फेल होने पर खुद की किडनी डोनेट कर उसे नयी जिंदगी दी है।
बेतालघाट निवासी भुवन चंद्र को पांच साल पहले वर्ष 2021 के नवंबर माह के दौरान किडनी में कुछ समस्या महसूस हुई। इस दौरान उनके पेट व किडनी में दर्द के साथ लगातार उल्टी की शिकायत हुई। इस पर उन्होंने रामनगर के सरकारी अस्पताल में डाक्टर से परामर्श लिया और अल्ट्रासाउंड समेत अन्य जांचें कराई। इसमें उनकी किडनी सिकुड़ी दिखी। इसके बाद करीब तीन साल तक कई अस्पतालों में इलाज कराया, जहां वर्ष 2024 की शुरुआत में वह डायलिसिस के लिए एम्स दिल्ली पहुंचे।
यहां करीब 10 दिन रुकने के बाद वह बेस अस्पताल हल्द्वानी के डायलिसिस केंद्र में इलाज को आ गए थे। ऐसे में डायलिसिस के बाद भी स्थिति ठीक न होने पर जनवरी 2025 में उन्हें डाक्टर ने किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दी, जिसकी प्रक्रिया शुरू हो गई। कई डोनरों की प्रोफाइल मैच न होने के बाद उनकी मां ने उन्हें अपने शरीर से एक किडनी देने की ठान ली। सभी प्रक्रिया व जांचें पूरी होने के बाद वर्ष 2025 नवंबर में उनकी मां आनंदी देवी ने उन्हें अपनी किडनी देकर पुत्र की जान बचाई है। इससे अब भुवन चंद्र स्वस्थ है।
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