सीएम धामी की चुटकी से सदन में हंसी, विपक्षी विधायक भी नहीं रोक पाए मुस्कान

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गैरसैंण: उत्तराखंड बजट सत्र के पांचवें दिन जब दोपहर सवा 12 बजे प्रश्नकाल समाप्त हुआ तो मद 7 के तहत मुख्यमंत्री पुष्कर धामी अपना वक्तव रखने सदन में पहुंचे. जैसे ही वो बोलने के लिए खड़े हुए कुछ ऐसा हुआ कि उन्होंने कांग्रेस को पूर्व सीएम नारायण दत्त तिवारी की याद दिलवा दी.

मुख्यमंत्री पुष्कर धामी सदन में अपने बयानों से ही नहीं अपने एक्सप्रेशन और हरफनमौला अंदाज से भी विपक्ष के साथ आम जनता का भी दिल लूट लेते हैं. ऐसा ही कुछ वाकिया आज तब देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी प्रश्नकाल के बाद सदन में पहुंचे.
सदन में ऐसा हुआ क्या? हुआ यूं कि पुष्कर सिंह धामी गैरसैंण बजट सत्र के पांचवें दिन मद 7 के तहत विविध वक्तव्य रखने के लिए आए. जिसमें वो उत्तराखंड सरकार की ओर से गुड गवर्नेंस में हासिल की गई उपलब्धि को लेकर अपना वक्तव्य रखने के लिए खड़े हुए और बोलने लगे. तभी सामने विपक्ष की ओर से आवाज आई की थोड़ा तेज बोलिए, आवाज नहीं आ रही है.

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इस पर सीएम धामी बोले कि ‘मेरी लंबाई ज्यादा है तो क्या करूं.’ इतने में विधानसभा स्पीकर ऋतु खंडूड़ी भी बोलीं कि ‘माइक लंबे करने पड़ेंगे…’ इसके बाद सामने से कांग्रेस विधायक बहुत सारी टिप्पणियां करने लगे और मुख्यमंत्री से मजाक करने लगे. इस पर मुख्यमंत्री धामी ने अपने चिर परिचित अंदाज में मुस्कुराते हुए कांग्रेस विधायकों को बोले कि वो तिवारी जी क्या कहते थे ध्यान है? ‘यूं तो यहां आने वाला हर कोई शक्त मेरे से बढ़ा है, लेकिन मेरा कद भी कुछ कम नहीं…’
शायराना और हाजिर जवाबी से माहौल हुआ खुशनुमा: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता व पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी की इन पंक्तियों को सदन में जब दोहराया और कांग्रेस के नेताओं से पूछा की याद है या नहीं, तो धामी की हाजिर जवाबी को देख कर सदन में हर कोई स्तब्ध रह गया. साथ ही माहौल खुशनुमा हो गया.

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विपक्ष के विधायकों के चेहरों पर दिखी मुस्कुराहट: वहीं, सामने विपक्ष से जो टिप्पणी कर रहे थे, उनमें यशपाल आर्य, काजी निजामुद्दीन, हरीश धामी, विक्रम नेगी, इंजीनियर रवि बहादुर, भुवन कापड़ी सभी के चेहरे पर सीएम धामी के इस शायराना अंदाज के बाद मुस्कुराहट थी. इसके बाद आगे गुड गवर्नेंस की अपनी उपलब्धि के बारे में वक्तव्य रखा.

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड राज्य को हाल के सालों में वित्तीय प्रबंधन, राजकोषीय अनुशासन और गुड गवर्नेंस के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर एक अग्रणी राज्य के रूप में मान्यता मिली है. उन्होंने कहा कि कुछ ही दिन पहले नीति आयोग की ओर से प्रकाशित मार्च 2026 में राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक (Fiscal Health Index FHI) 2026 का दूसरा संस्करण जारी किया गया, जो राज्यों के वित्तीय प्रदर्शन का आकलन करता है.

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उसमें दोबारे उत्तराखंड के वित्तीय प्रबंधन को सराहा गया है. इस रिपोर्ट में उत्तराखंड को उत्तरपूर्वी हिमालय राज्यों की श्रेणी में दूसरा स्थान मिला हुआ है. यह रैंकिंग मुख्यतः राजस्व रैंकिंग, व्यव की गुणवत्ता, डेफसेट मेनेजमेंट और ऋण प्रबंधन में सुधार का द्योतक है. इसके अलावा अरुण जेटली फाइनेंशियल मैनेजमेंट की रिपोर्ट में उत्तराखंड को विशेष दर्जा प्राप्त हिमालय राज्यों में अरुणाचल के बाद दूसरा स्थान मिला है.

उन्होंने कहा कि महालेखाकार से मिले रिपोर्ट के अनुसार भी हमने पीआरबीएम PRBM (Physical Responsibility and Budget Management Act) में निर्देशित मानकों का पालन किया है. रेवन्यू सरप्लस के स्टेटस को मैंटेन रखा है. हमारा फिजिकल डेफिसेट जीएसडीपी (GSDP) की निर्धारित सीमा के अंतर्गत है
. हेडिंग बना कर दे

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