उत्तराखंड पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के अवकाश ऐलान से सियासत गर्म, समर्थक हुए आक्रामक

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अगले विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड कांग्रेस में वर्चस्व को लेकर गुटीय खींचतान तेज हो गई है।
पांच दिन पहले नई दिल्ली में तीन पूर्व विधायकों समेत छह नेताओं को पार्टी में सम्मिलित कराने की घटना में उपेक्षा से आहत पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के 15 दिन अर्जित अवकाश लेने की घोषणा से पार्टी की अंदरूनी राजनीति गर्मा गई है।
उनके समर्थक खुलकर मोर्चा लेने के मूड में हैं। प्रदेश कांग्रेस चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत की हरीश रावत पर की गई टिप्पणी के विरोध में पिथौरागढ़ जिले के धारचूला से विधायक हरीश धामी ने मोर्चा खोल दिया।

उन्होंने हरीश रावत के आत्मसम्मान के लिए सामूहिक इस्तीफा देने की पेशकश कर डाली।

कांग्रेस की उत्तराखंड प्रभारी एवं सांसद कुमारी सैलजा के आठ अप्रैल से राज्य के प्रस्तावित पांच दिवसीय दौरे से पहले पार्टी का अंतर्कलह सतह पर आ गया है।

प्रदेश में पार्टी के कद्दावर नेता व पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत फिलहाल पार्टी के भीतर उपेक्षा महसूस कर रहे हैं। उनके बयानों और संदेशों में यह भाव महसूस किया जा रहा है।

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बीती 28 मार्च को नई दिल्ली में प्रदेश के तीन पूर्व विधायकों समेत छह नेताओं को पार्टी में शामिल कराने के कार्यक्रम में हरीश रावत शामिल नहीं हुए थे।

रावत नैनीताल जिले के रामनगर क्षेत्र से निर्दल चुनाव लड़ चुके संजय नेगी को भी कांग्रेस में सम्मिलित कराने की पैरोकारी कर रहे थे, लेकिन उनके इस प्रयास को फिलहाल पार्टी ने ठंडे बस्ते में डाल दिया।

आहत हरीश रावत ने तंज के अंदाज में 15 दिन का अर्जित अवकाश लेने की घोषणा कर डाली। इसके बाद से ही उनके समर्थक उद्वेलित हैं। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने संजय नेगी की ज्वाइनिंग टालने को हरीश रावत की उपेक्षा करार दिया।

कुंजवाल के बयान पर चुनाव प्रबंध समिति अध्यक्ष हरक सिंह रावत के बयान से धामी भड़क गए। हरक सिंह रावत कह चुके हैं कि किसी को गलतफहमी या घमंड नहीं होना चाहिए कि वह नहीं होगा तो पार्टी जीतेगी नहीं या पार्टी खत्म हो जाएगी।

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पार्टी से हरीश रावत को बहुत कुछ मिला है, यदि वह कुछ दिन विश्राम चाहते हैं तो किसी को दिक्कत नहीं होनी चाहिए।

वर्ष 2016 में तत्कालीन हरीश रावत सरकार के विरुद्ध पार्टी विधायकों की बगावत के बाद हरक सिंह एवं हरीश रावत के बीच लंबे समय तक छत्तीस का आंकड़ा रहा है।

हरक सिंह का यह बयान विधायक हरीश धामी को नागवार गुजरा। धामी ने इंटरनेट मीडिया पर अपनी पोस्ट में हरक सिंह पर पलटवार किया।

उन्होंने कहा कि हरक सिंह रावत वही व्यक्ति हैं जिन्होंने वर्ष 2016 में कुछ विधायकों को भाजपा में शामिल कर कांग्रेस सरकार को अस्थिर करने का काम किया।

हरक सिंह रावत ने देवभूमि में दलबदल का महापाप किया था। हाईकमान को इस बात को नहीं भूलना चाहिए। यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि जो एक बार धोखा दे सकता है, वह दोबारा भी यह कर सकता है।

ज्वाइनिंग पर हाईकमान को लेना है निर्णय: संजय नेगी

रामनगर के ज्येष्ठ ब्लाक उपप्रमुख संजय नेगी पिछला विधानसभा चुनाव रामनगर से ही कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ लड़ चुके हैं।

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उनकी पत्नी ब्लाक प्रमुख हैं। इस प्रकरण पर संजय नेगी ने भी बयान जारी किया। संजय नेगी ने कहा कि कांग्रेस उनके डीएनए में है। पार्टी में उनकी ज्वाइनिंग पर निर्णय हाईकमान के साथ ही प्रदेश अध्यक्ष एवं अन्य वरिष्ठ नेताओं को लेना है।

कांग्रेस उन्हें रामनगर से टिकट देती है तो वह जरूर जीतेंगे। यदि रंजीत रावत को सल्ट भेजती है तो हम वह सीट भी जीतेंगे।

हरीश रावत के नेतृत्व में ही पिछले दो चुनाव लड़े गए: रणजीत रावत

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक रणजीत रावत ने भी इस प्रकरण पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 और वर्ष 2022 का चुनाव हरीश रावत के नेतृत्व में ही लड़ा गया और पार्टी की क्या हालत हुई, सबको पता है। बार-बार चुनाव से पहले इस विषय को जानबूझकर उठाया जाता है। एक नेता की हर बार बात की जाती है।

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