देहरादून। उत्तराखंड में आयुष्मान और अटल आयुष्मान योजनाओं के लाभार्थियों को कैशलेस उपचार देने में लापरवाही बरतने वाले अस्पतालों पर राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने सख्त कार्रवाई की है। जांच में अनियमितताएं और मरीजों से अवैध वसूली की शिकायतें सही पाए जाने पर तीन अस्पतालों की संबद्धता निलंबित कर दी गई, जबकि एक अस्पताल पर भारी जुर्माना लगाया गया है।
कैशलेस इलाज से इनकार पड़ा भारी
प्राधिकरण के अनुसार, बरेली स्थित एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज और देहरादून के ओजस्वी व अरिहंत अस्पताल की संबद्धता तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी गई है। जांच में सामने आया कि कई लाभार्थियों को कैशलेस उपचार नहीं दिया गया और रेफरल मरीजों को भर्ती करने से भी इनकार किया गया।
अवैध वसूली और लापरवाही उजागर
ओजस्वी अस्पताल में एक आयुष्मान लाभार्थी से 12 हजार रुपये की अवैध वसूली का मामला सही पाया गया। इसके बाद अस्पताल की संबद्धता निलंबित करने के साथ 60 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
निरीक्षण के दौरान कुछ अस्पतालों में डॉक्टरों की अनुपलब्धता, पोर्टल पर गलत जानकारी और उपचार संबंधी मानकों की अनदेखी भी सामने आई।
डायलिसिस यूनिट में मिली गंभीर खामियां
अरिहंत अस्पताल की डायलिसिस यूनिट में संक्रमण नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था और चिकित्सकीय निगरानी से जुड़ी गंभीर कमियां पाई गईं। प्राधिकरण ने अस्पताल को 15 दिन के भीतर सुधार रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
बलूनी अस्पताल पर 86 हजार से अधिक का जुर्माना
बलूनी अस्पताल में एक लाभार्थी से दवाइयों और जांच के नाम पर 17,250 रुपये वसूले जाने की पुष्टि हुई। आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत न करने पर अस्पताल पर 86,250 रुपये का जुर्माना लगाया गया और 15 दिनों के भीतर सभी कमियां दूर करने का अल्टीमेटम दिया गया है।
राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि आयुष्मान योजना के तहत मरीजों के अधिकारों से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों के खिलाफ भविष्य में डी-एम्पैनलमेंट जैसी कठोर कार्रवाई भी की जा सकती है।

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