उत्तराखंड। प्रदेश के युवाओं और प्रवासियों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए संचालित मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का बड़ा अवसर दे रही है। योजना के तहत पात्र आवेदकों को अपना व्यवसाय या लघु उद्योग शुरू करने के लिए बैंक के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराया जाता है। परियोजना की प्रकृति के अनुसार अधिकतम 25 लाख रुपये तक की लागत वाली निर्माण क्षेत्र की परियोजनाओं को योजना में शामिल किया गया है।
योजना की खास बात यह है कि सरकार की ओर से परियोजना लागत के आधार पर अनुदान यानी मार्जिन मनी की सुविधा भी दी जाती है। उपलब्ध योजना विवरण के अनुसार विभिन्न श्रेणियों के जिलों में परियोजना लागत का 15 से 25 प्रतिशत तक अनुदान निर्धारित किया गया है। इससे नए उद्यम शुरू करने वाले युवाओं पर शुरुआती आर्थिक बोझ कम होता है।
रोजगार मांगने के बजाय रोजगार देने का अवसर
मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का उद्देश्य युवाओं को अपना कारोबार शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करना है। योजना के जरिए कृषि आधारित गतिविधियों, डेयरी, बेकरी, पर्यटन, होमस्टे, सेवा क्षेत्र और अन्य छोटे उद्यमों को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।
पहाड़ में पलायन रोकने पर जोर
उत्तराखंड के पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना योजना का एक अहम उद्देश्य है। स्थानीय स्तर पर कारोबार और रोजगार मिलने से युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे शहरों की ओर पलायन करने की जरूरत कम हो सकती है। सरकार इसी माध्यम से गांवों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है।
33,600 से अधिक लोग लाभान्वित
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मुताबिक मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0 के माध्यम से 33,600 से अधिक लोग लाभान्वित हुए हैं। योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता से युवा अपना उद्यम शुरू करने के साथ ही आगे अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर रहे हैं।
योजना में आवेदन और पंजीकरण के लिए उत्तराखंड सरकार का आधिकारिक पोर्टल उपलब्ध है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का आधिकारिक पोर्टल
ऐसे करें आवेदन
- आधिकारिक पोर्टल https://msy.uk.gov.in/ पर जाएं।
- होमपेज पर रजिस्टर बटन पर क्लिक करें। फिर डीटेल भरें।
- प्राप्त यूजरनेम और पासवर्ड से पोर्टल पर लॉगइन करें।
- अब फॉर्म में मांगी गई जानकारी भरें। फिर सबमिट कर दें।
ये हैं पात्रता की शर्तें
- आवेदक उत्तराखंड का स्थायी निवासी होना चाहिए।
- न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए।
- किसी विशेष शैक्षणिक योग्यता की बाध्यता नहीं।
लाभ और उद्देश्य
- पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकना
- युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना
- ग्रामीण आर्थिकी मजबूत करना

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