वैश्विक अध्ययन में सामने आया स्नेकबाइट का भयावह आंकड़ा, ग्रामीण क्षेत्रों में एंटीवेनम की कमी और स्वास्थ्य सुविधाओं की दूरी बनी बड़ी चुनौती
डिजिटल डेस्क। सांप का काटना यानी स्नेकबाइट दुनियाभर में एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बना हुआ है। हर सांप के काटने पर शरीर में जहर नहीं पहुंचता, लेकिन जब विष शरीर में प्रवेश कर जाता है, तो यह स्थिति जानलेवा हो सकती है। उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में रहने वाले गरीब ग्रामीण समुदाय इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित हैं। समय पर अस्पताल न पहुंच पाना, एंटीवेनम की कमी और स्वास्थ्य सुविधाओं तक सीमित पहुंच के कारण कई लोगों की जान चली जाती है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, दुनिया के कई देशों में सांप के काटने और इससे होने वाली मौतों के सटीक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। बड़ी संख्या में पीड़ित अस्पताल तक नहीं पहुंच पाते या पारंपरिक उपचार पर निर्भर रहते हैं। ऐसे मामले सरकारी स्वास्थ्य रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो पाते, जिससे इस समस्या का वास्तविक आकलन करना मुश्किल हो जाता है।
79 देशों के आंकड़ों का किया गया विश्लेषण
सांप के काटने से होने वाली मौतों और स्वास्थ्य संबंधी नुकसान का आकलन करने के लिए शोधकर्ताओं ने 31 मार्च 2025 तक प्रकाशित अध्ययनों की समीक्षा की। इसमें 79 देशों के उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण किया गया और वर्ष 2008 के ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज अध्ययन के आंकड़ों को भी आधार बनाया गया।
जहां पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं थी, वहां शोधकर्ताओं ने भौगोलिक और सांख्यिकीय मॉडल का सहारा लिया। इसमें वास्तविक आंकड़ों के साथ स्थानीय पर्यावरणीय और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों को शामिल किया गया, ताकि सांप के काटने से होने वाले वैश्विक नुकसान का अधिक व्यापक अनुमान लगाया जा सके।
हर साल 70 लाख तक लोगों के शिकार होने का अनुमान
अध्ययन के मॉडल के अनुसार, दुनियाभर में हर साल कम से कम 21 लाख लोग सांप के काटने का शिकार हो सकते हैं। यह अनुमान बढ़कर 70 लाख तक पहुंच सकता है। आंकड़ों में दर्ज न हो पाने वाले मामलों को ध्यान में रखने के बाद सालाना मौतों का अनुमान 2.74 लाख से 5.13 लाख तक लगाया गया है।
ये आंकड़े अनुमान पर आधारित हैं और वास्तविक संख्या देशों में उपलब्ध स्वास्थ्य रिकॉर्ड तथा अध्ययन की पद्धति के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसके बावजूद शोधकर्ताओं का मानना है कि सांप के काटने का संकट आधिकारिक आंकड़ों में दिखाई देने वाली तस्वीर से कहीं अधिक गंभीर हो सकता है।
सब-सहारा अफ्रीका में स्थिति सबसे गंभीर
अध्ययन में उप-सहारा अफ्रीका को सांप के काटने से होने वाले नुकसान का एक प्रमुख केंद्र बताया गया है। इस क्षेत्र में सॉ-स्केल्ड वाइपर, पफ एडर, अफ्रीकी कोबरा और मांबा जैसे विषैले सांप पाए जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग खेती और अन्य कामों के लिए खुले इलाकों में जाते हैं, जिससे उनके सांप के संपर्क में आने का खतरा बढ़ जाता है।
कई ग्रामीण बस्तियों में अस्पताल दूर होने, परिवहन की कमी और एंटीवेनम समय पर उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को उचित उपचार नहीं मिल पाता। नाइजीरिया, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और इथियोपिया जैसे देशों के ग्रामीण क्षेत्रों में यह चुनौती विशेष रूप से गंभीर है।
हर साल लाखों लोगों को झेलनी पड़ सकती है स्थायी विकलांगता
सांप के काटने से बचने वाले सभी लोग पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो पाते। अनुमान के अनुसार, हर साल आठ लाख से अधिक लोग लंबे समय तक रहने वाली शारीरिक विकलांगता का सामना कर सकते हैं। गंभीर मामलों में प्रभावित अंग को काटने की नौबत आ सकती है, जबकि कुछ लोगों को लंबे समय तक इलाज और पुनर्वास की जरूरत पड़ती है।
इसका असर केवल मरीज तक सीमित नहीं रहता। परिवार की आय प्रभावित होती है, इलाज का खर्च बढ़ता है और पहले से आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे ग्रामीण परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
डब्ल्यूएचओ का लक्ष्य: 2030 तक मौतों और विकलांगता में 50 प्रतिशत कमी
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने वर्ष 2030 तक सांप के काटने से होने वाली मौतों और विकलांगता को 50 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए विशेषज्ञों ने उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान, एंटीवेनम की पर्याप्त उपलब्धता और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर जोर दिया है।
इसके साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने, मरीजों को जल्द अस्पताल पहुंचाने के लिए परिवहन व्यवस्था बेहतर बनाने और सांप के काटने से बचाव के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। विशेषज्ञों के मुताबिक, सटीक आंकड़े जुटाना और सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में समय पर इलाज सुनिश्चित करना इस वैश्विक स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए बेहद जरूरी है।
न्यूज़ सोर्स:- News18 हिंदी
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