लालकुआँ विधानसभा क्षेत्र में तेजी से फैलते अवैध शराब, कच्ची शराब, स्मैक एवं अन्य नशीले पदार्थों के कारोबार को लेकर अब जनआक्रोश खुलकर सामने आने लगा है। क्षेत्र में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को सामाजिक संकट ही नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ी के भविष्य पर गंभीर खतरे के रूप में देखा जा रहा है।
क्षेत्र की गलियों में नशे की गिरफ्त में फंसते युवा, चिंतित अभिभावक और बच्चों के भविष्य को लेकर भयभीत माताओं की स्थिति ने समाज को झकझोर कर रख दिया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अब यह समस्या असहनीय स्तर तक पहुँच चुकी है।
नशे के बढ़ते जाल के खिलाफ क्षेत्र के जागरूक नागरिकों, जनप्रतिनिधियों एवं ग्राम प्रधानों के सहयोग से “क्षेत्रीय जन समस्या निवारण संघर्ष समिति” का गठन किया गया है। समिति द्वारा संबंधित अधिकारियों को लिखित शिकायतें सौंपने, अवैध गतिविधियों की सूचनाएं प्रशासन तक पहुंचाने तथा लगातार जनजागरण अभियान चलाने जैसे लोकतांत्रिक प्रयास किए गए हैं।
समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रशासन को संवाद और कार्रवाई के पर्याप्त अवसर दिए गए, लेकिन यदि इसके बावजूद नशे का कारोबार खुलेआम जारी रहता है तो यह कानून व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।
समिति ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति, दल या राजनीतिक विचारधारा के खिलाफ नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के विरोध में है जो युवाओं को नशे के दलदल में धकेलने वालों पर प्रभावी कार्रवाई करने में विफल नजर आती है।
युवाओं से आह्वान करते हुए समिति ने कहा कि नशे के खिलाफ खड़ा होना ही वास्तविक सामाजिक क्रांति है। अपने मित्रों, मोहल्लों और शहर को बचाने की जिम्मेदारी अब स्वयं युवाओं को उठानी होगी। वहीं मातृशक्ति से भी इस मुहिम में सक्रिय भागीदारी की अपील की गई है, क्योंकि समाज परिवर्तन की सबसे बड़ी शक्ति माँ का संकल्प माना जाता है।
इसी क्रम में 26 फरवरी को लालकुआँ तहसील परिसर में एक दिवसीय शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ संकल्पित धरना आयोजित किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार आंदोलन पूरी तरह संविधान और कानून की मर्यादा में रहकर संचालित होगा, लेकिन अब जनता की आवाज दबाई नहीं जा सकेगी।
धरने के माध्यम से लालकुआँ को नशामुक्त बनाने का संकल्प जनआंदोलन का रूप लेने लगा है।
लेटेस्ट न्यूज़ अपडेट के लिए -
www.devbhumionline.com
