देहरादून।
जापान की एजेंसी जायका (जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी) के वित्तीय सहयोग से उत्तराखंड में वन संसाधन प्रबंधन परियोजना के द्वितीय चरण की तैयारियां शुरू हो गई हैं। 10 वर्षों की इस महत्वाकांक्षी परियोजना की अनुमानित लागत करीब 1500 करोड़ रुपये आंकी गई है।
शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उनके आवास पर जायका के भारत में मुख्य प्रतिनिधि टेकुची टकुरो ने मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने परियोजना के दूसरे चरण के लिए जायका की ओर से हरसंभव सहयोग देने का भरोसा दिलाया। बाद में उन्होंने वन मंत्री सुबोध उनियाल से भी भेंट कर परियोजना की प्रगति और आगामी योजनाओं पर चर्चा की।
गौरतलब है कि जायका वित्त पोषित वन संसाधन प्रबंधन परियोजना का पहला चरण वर्ष 2014 में शुरू हुआ था, जिसकी लागत 807 करोड़ रुपये थी। कोरोना काल के कारण इसकी अवधि बढ़ाकर 31 अगस्त 2026 तक कर दी गई है। इस परियोजना के तहत 13 वन प्रभागों की 37 रेंजों के 839 वन पंचायतों में कार्य किए गए हैं।
परियोजना के अंतर्गत ईको रेस्टोरेशन, आजीविका संवर्धन और भूकटाव रोकथाम के लिए जापानी तकनीक का उपयोग किया गया, जो अब पूर्णता की ओर है।
अब द्वितीय चरण के लिए वर्ष 2026 से 2035 तक की प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार हो चुकी है। इस चरण में 47 रेंजों को शामिल किया जाएगा। परियोजना में 85 प्रतिशत वित्तीय सहयोग जायका और 15 प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।
वन विभाग ने इस संबंध में अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी है, जिस पर वित्त विभाग में विचार-विमर्श जारी है। इसके बाद प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
बैठक के दौरान जायका के मुख्य प्रतिनिधि टेकुची टकुरो ने परियोजना की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और भविष्य में भी सहयोग जारी रखने की बात कही। इस अवसर पर जायका के मुख्य विकास संचालक विनीत सरीन और परियोजना के मुख्य निदेशक नरेश कुमार भी उपस्थित रहे।
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