लालकुआं (नैनीताल)। वन अधिकार संगठन, बिंदुखत्ता द्वारा उपजिलाधिकारी लालकुआं को एक पत्र भेजकर बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की प्रक्रिया में हो रही देरी पर चिंता जताई गई है। संगठन ने बताया कि वर्षों से वन अधिकार अधिनियम-2006 के तहत पात्र होने के बावजूद बिंदुखत्ता के निवासियों को राजस्व ग्राम का दर्जा नहीं मिल पाया है।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि 19 जून 2024 को जिला स्तरीय समिति (DLC) ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव शासन को भेजा था, लेकिन करीब 16 माह बाद 17 अक्टूबर 2025 को पत्रावली वापस कर दी गई। इसके बाद 11 नवंबर 2025 को जिलाधिकारी नैनीताल द्वारा पुनः परीक्षण के आदेश दिए गए, जिससे मामला अब तक लंबित है। 18 फरवरी 2026 को हुए प्रदर्शन के दो माह बाद भी कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है।
संगठन का कहना है कि शासन और जिला स्तरीय समिति के बीच निर्णय को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इस देरी से क्षेत्र के लोगों में असंतोष और भविष्य को लेकर चिंता बढ़ रही है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि मामला उच्च न्यायालय तक जाता है, तो इसके दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं।
इसी क्रम में वनाधिकार समिति ने जानकारी दी कि राज्य स्तरीय निगरानी समिति से भी लगातार सुनवाई की मांग की जा रही है, लेकिन अभी तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। वहीं, सरकार द्वारा प्रदेशभर में “जन-जन की सरकार” कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, लेकिन बिंदुखत्ता को इससे अलग रखा गया है।
इन परिस्थितियों के बीच क्षेत्र के ग्रामीणों द्वारा 4 से 5 मई 2026 तक शहीद स्मारक, बिंदुखत्ता के पास “जन-जन की सरकार—कब आएगी बिंदुखत्ता के द्वार” कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस दौरान क्रमिक अनशन भी किया जाएगा और 6 मई 2026 को उसी स्थान पर विशाल जनसभा का आयोजन होगा, जिसमें सरकार और प्रशासन से राजस्व ग्राम की मांग पर खुली चर्चा की जाएगी।
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