लालकुआं: बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग को लेकर शनिवार को क्षेत्रवासियों ने जोरदार आवाज उठाई। वन अधिकार समिति बिंदुखत्ता और पूर्व सैनिक संगठन के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोग तहसील लालकुआं पहुंचे और तहसीलदार के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर शीघ्र अधिसूचना जारी करने की मांग की।
ज्ञापन में कहा गया कि वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत जनपद नैनीताल के वनग्राम बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने का दावा 19 जून 2024 को जिला स्तरीय वनाधिकार समिति द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया जा चुका है। इसके बावजूद अब तक इसकी अधिसूचना जारी नहीं की गई है, जिससे क्षेत्र के लोगों में नाराजगी है।
समिति का आरोप है कि राज्य सरकार अधिसूचना जारी करने के बजाय मामले को कैबिनेट के माध्यम से केंद्र सरकार को भेजकर वन भूमि के अनारक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट ले जाने की तैयारी कर रही है। समिति का कहना है कि यदि ऐसा हुआ तो बिंदुखत्ता की वर्षों पुरानी मांग और अधिक उलझ सकती है।
ज्ञापन में यह भी बताया गया कि देश में वन अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद लगभग 1600 वन ग्रामों को बिना वन भूमि अनारक्षित किए ही राजस्व ग्राम घोषित किया जा चुका है, जिनमें उत्तराखंड के भी कई गांव शामिल हैं। ऐसे में बिंदुखत्ता के मामले में अलग प्रक्रिया अपनाना उचित नहीं होगा।
वन अधिकार समिति का कहना है कि यदि मामला सुप्रीम कोर्ट में भेजा गया और भविष्य में क्षेत्र के खिलाफ कोई निर्णय आता है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और राज्य सरकार की होगी।
समिति ने सरकार से मांग की है कि जिला स्तरीय वनाधिकार समिति द्वारा 19 जून 2024 को पारित दावे के आधार पर बिंदुखत्ता को तत्काल राजस्व ग्राम घोषित करने की अधिसूचना जारी की जाए।
समिति ने चेतावनी दी कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो क्षेत्र के लोग आंदोलन तेज करने के लिए मजबूर होंगे।
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