लालकुआँ नगर में आयोजित विराट हिन्दू सम्मेलन आध्यात्म, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति की भावना से ओतप्रोत रहा। अम्बेडकर पार्क में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में सैकड़ों श्रद्धालुओं, मातृशक्ति, युवाओं एवं बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सम्मेलन का मुख्य आकर्षण श्रीमद्भगवद्गीता का सामूहिक वितरण रहा, जिसके माध्यम से समाज में नैतिक मूल्यों, कर्तव्यपरायणता और आध्यात्मिक जागरण का संदेश दिया गया।
वक्ताओं ने अपने उद्बोधन में कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला दिव्य मार्गदर्शक है। गीता का प्रत्येक श्लोक व्यक्ति को धर्म, सत्य, त्याग और कर्मयोग का संदेश देता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे गीता के सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।
कार्यक्रम में उपस्थित संत-महात्माओं और गणमान्य अतिथियों ने कहा कि वर्तमान समय में भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों के संरक्षण की आवश्यकता है। गीता वितरण जैसे प्रयास समाज को एकजुट करने और आध्यात्मिक चेतना जागृत करने का सशक्त माध्यम हैं।
सम्मेलन के दौरान देशभक्ति से ओतप्रोत गीतों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और वैदिक मंत्रोच्चार ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। अंत में आयोजकों ने सभी उपस्थित जनों का आभार व्यक्त करते हुए समाज में सद्भाव, एकता और आध्यात्मिक उन्नति के लिए निरंतर प्रयासरत रहने का संकल्प दोहराया।
यह विराट हिन्दू सम्मेलन लालकुआँ में सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक जागरण की एक नई मिसाल बनकर उभरा।
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